दुमका में लगने वाले झारखंड के जनजातीय हिजला‌ मेला की तैयारी पूरी

130 वर्ष पुराना है प्रकृति के मनोरम दृश्यों के बीच लगने वाले हिजला‌ मेला का इतिहास

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Dumka/News lens:दुमका में प्रकृति के मनोरम दृश्यों के बीच लगने वाले झारखंड के एेतिहासिक जनजातीय 130 वर्ष पुराना हिजला‌ मेला महोत्सव की तैयारी पूरी कर ली गयी है। संताल परगना की सांस्कृतिक परंपराओं एवं विरासत अौर ग्रामीण विकास को दर्शाने वाला यह मेला आज से शुरू होगा।

दुमका शहर से चार किलोमीटर दूर हिजला पहाड़ी की ढलान अौर मयूराक्षी नदी के बीच की मनोरम भूमि पर हर साल लगने वाला जनजातीय हिजला मेला अब से कुछ देर बाद (शुक्रवार शाम) शुरू होने वाला है। 1855 के संताल विद्रोह के बाद फिर से आदिवासी अौर भारतीय ग्रामीण समाज में ब्रिटिश हुकूमत के प्रति विश्वास पैदा करने के लिए 1890 में दुमका के तत्कालीन उपायुक्त जॉन आर कास्टेयर्स ने इस मेले की शुरुआत की थी। तब से हर साल यह मेला इसी स्थान‌ पर लगता आया है। 1978 में इस सांस्कृतिक मेले के साथ जनजातीय शब्द जोड़ा गया अौर 2008 में झारखण्ड सरकार ने इसे राजकीय महोत्सव का दर्जा दिया। इस साल यह मेला 130वें साल में प्रवेश कर रहा है। लिहाजा इस अवसर को खास बनाने के लिए इस बार मयूराक्षी नदी किनारे 130 पौधे लगाये जायेंगे।

इस बार भी यह मेला 7 फरबरी से शुरू होकर 14 फरवरी तक चलेगा जिसमे कई सांस्कृतिक कार्यक्रम होंगे। कृषि, हस्तशिल्प, पशुपालन अौर ग्रामीण विकास पर आधारित प्रदर्शनीय लगेंगी साथ ही खेल- कूद प्रतियोगिताएं होंगी अौेर जन संवाद के कार्यक्रम होंगे। सरकारी विभागों के स्टॉल सज चुके हैं, कृषि प्रदर्शनी इस बार भी आकर्षण के केंद्र में होगी। मेले में सुरक्षा के मद्देनज़र भी काफी संख्या में पुलिस बल की तैनाती की गयी है।

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