Logo
ब्रेकिंग
बीएफसीएल द्वारा महेश्वर धाम में दो दिवसीय निःशुल्क नेत्र जांच शिविर का आयोजन, 163 लाभार्थियों की हुई... झारखंड को मिली बड़ी सौगात,17 जनवरी को खुलेगा सब-डीओ कार्यालय, आर्मी लैंड केस अब लोकल लेवल पर! गुरुजी के घर पहुंचे अखिलेश यादव, भावुक होकर कहा – आदिवासियों की आवाज़ हमेशा गूंजेगी मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन राजनीति की चकाचौंध से दूर पैतृक गांव नेमरा की मिट्टी में रचे-बसे नज़र आ रहे ... रामगढ़ की बेटी चंद्र ज्योति उपाध्याय ने रचा इतिहास, JPSC में पाई 70वीं रैंक, बनीं डिप्टी कलेक्टर युवा आजसू का संकल्प – हर गांव, हर विद्यालय में हरा अभियान! आफ़ताब अंसारी के मामले कि जांच और परिजनों को मिले मुआवजा : जोया प्रवीण रामगढ़ थाना से फरार आफताब कि मौ*त, जमकर बवाल, इंस्पेक्टर प्रमोद सिंह और कई पुलिसकर्मी निलंबित रामगढ़ डीसी बने फरिश्ता, बेहोश स्कूली बच्चे को अपनी गाड़ी से पहुंचाया अस्पताल, बचाई जान प्रधान सचिव पेयजल एवं स्वच्छता विभाग झारखंड सरकार श्री मस्त राम मीणा ने किया रामगढ़ जिले का दौरा।

हिरासत में मौत घृणित अपराध, माफ नहीं किया जा सकता : सुप्रीम कोर्ट

नई दिल्ली। हिरासत में मौत का मामला एक घृणित कृत्य है और सभ्य समाज में इसे स्वीकार नहीं किया जा सकता। सुप्रीम कोर्ट ने यह बात गुरुवार को ओडिशा में हिरासत में हुई मौत के मामले की सुनवाई करते हुए कही। 1988 की इस घटना में दो पुलिसकर्मी दोषी पाए गए हैं। सुप्रीम कोर्ट ने दोषी पुलिसकर्मियों को किसी तरह की राहत देने से इन्कार कर दिया। शीर्ष न्यायालय ने कहा, यह अपराध केवल मृतक के खिलाफ नहीं है बल्कि समूची मानवता के खिलाफ है। यह संविधान के अनुच्छेद 21 का भी उल्लंघन है जिसमें व्यक्ति को जीने का अधिकार दिया गया है।

पुलिस सुरक्षा देने के लिए है, भय पैदा करने के लिए नहीं

सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस अशोक भूषण और जस्टिस अजय रस्तोगी की पीठ ने मामले को आइपीसी की धारा 324 (हृदय संबंधी बीमारी) में तब्दील किए जाने की मांग को नामंजूर कर दिया। पीठ ने कहा कि किसी भी व्यक्ति को पुलिस थाने में बर्बरता से पीटा जाना पूरे समाज को भयभीत करता है और पुलिस के प्रति लोगों के विश्वास को कम करता है। लोगों में विश्वास होता है कि पुलिस उनकी जान और संपत्ति की सुरक्षा के लिए है। लेकिन इस तरह की घटनाएं इस भावना को कमजोर करती हैं। इसलिए इस तरह की घटनाओं के दोषियों को निश्चित रूप से दंडित किया जाना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट का यह आदेश उन दो अवकाश प्राप्त अधिकारियों की याचिका पर आया है जो हाईकोर्ट से दंडित किए जा चुके हैं।

दोनों अधिकारी ओडिशा के एक थाने में एक व्यक्ति की बर्बर पिटाई के दोषी पाए गए थे जिसकी बाद में मौत हो गई थी। इन पूर्व अधिकारियों ने अपनी याचिका में मौत का कारण मृतक की हृदय संबंधी बीमारी बताया था।