भारतीय सेना में अपाचे और रोमियो की आहट से घबराया पाक, ‘नमेस्‍ते ट्रंप’ के अपने ही बयान से पलटा

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नई दिल्‍ली। ‘नमस्‍ते ट्रंप’ के बाद पाकिस्‍तान ने राष्‍ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप के बयान को अपने पक्ष में बताया था। पाकिस्‍तान की इमरान सरकार के मंत्रियों ने ट्रंप के बयान की अपने तरह से व्‍याख्‍या की थी। ट्रंप के यात्रा के दो दिन बाद पाकिस्‍तान अपने ही बयान से पलट गया है। भारत और अमेरिका के रक्षा सौदों से उसकी नींद उड़ गई है। इसने पाकिस्‍तान की बेचैनी को बढ़ा दी है। पाकिस्‍तान की सरकार जो ट्रंप के बयान पर अपनी पीठ थपथपा रही थी वह अचानक यूटर्न ले ली। आखिर उसकी चिंता की क्‍या है बड़ी वजह। रक्षा सौदे से पाकिस्‍तान क्‍यों धबड़ाया। आखिर क्‍या है AH-64E अपाचे और एमएच -60 रोमियो हेलिकॉप्टर। क्‍या है इसकी खूबियां।

अमेरिका-भारत रक्षा सौदे से पाकिस्तान की बेचैनी बढ़ी

भारत और अमेरिका के बीच हाल में हुए रक्षा सौदे ने पाकिस्तान की बेचैनी बढ़ा दी है। पाकिस्‍तान ने कहा इससे दोनों देशों के बीच हथियारों की होड़ बढ़ेगी। अमेरिका और भारत के बीच तीन अरब डाॅलर रक्षा सौदे पर पाकिस्तान विदेश मंत्रालय ने अपनी बड़ी चिंता जाहिर की है। ट्रंप की भारत यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच हुए अरबों डॉलर के रक्षा करार पर पाकिस्तान को आपत्ति है। पाकिस्तान कई बार अंतरराष्‍ट्रीय समुदाय से क्षेत्र में हथियारों की होड़ को लेकर अपनी चिंता जता चुका है।

पहले पाक ने नमस्‍ते ट्रंप पर दी सधी हुई प्रतिक्रिया 

आर्थिक तंगी से जूझ रहा पाकिस्‍तान ने नमस्‍ते ट्रंप पर बहुत सधी हुई प्रतिक्रिया दी थी। उसने दावा किया है कि अमेरिकी राष्‍ट्रपति ट्रंप ने पाकिस्‍तान के साथ बे‍हतर रिश्‍तों की बात की है। पाकिस्‍तानी मीडिया ट्रंप के भाषण के इन बातों का जिक्र न करते हुए पाकिस्‍तान समर्थक बताकर उसका प्रचार कर रहा है। पाक मीडिया के अनुसार, ट्रंप ने अपने भाषण में पाकिस्‍तान की तारीफ की है। पाकिस्‍तान सरकार ने बड़ी चतुराई से इस्‍लामिक कट्टरवाद से अपने आपको अलग कर लिया, जबकि भारत पाकिस्‍तान में पोषित आतंकवाद से पीडि़त है। ट्रंप का इशारा उस ओर ही था, लेकिन पाकिस्‍तान ने उसकी पूरी तरह से अनदेखी की।

AH-64E अपाचे हलिकॉप्‍टर

  • अपाचे AH-64E अपाचे हलिकॉप्‍टर भारतीय सेना की रक्षात्‍मक क्षमता में वृद्धि करेगा। वहीं यह भारतीय सेना को जमीन पर मौजूद खतरों से लड़ने में सहायक होगा।
  • इससे सेना का आधुनिकीकरण भी होगा। पाकिस्‍तान की चिंता यह है कि इन हेलिकॉटरों को पठानकोट एयरपेस पर तैनात किया गया है, क्‍योंकि यहां से सटी सीमा अक्‍सर तनावगस्‍त रहती है।
  • दो इंजनों वाला यह हेलिकॉप्‍टर अपनी तेज रफ्तार के लिए जाना जाता है। यह दुश्‍मन को बिना आहट लगे लक्ष्‍य को तेजी से भेदने में सक्षम है। साथ ही दुश्‍मन के विमानों का तेजी से पीछा कर सकता है। इसकी अधिकतम रफ्तार 280 किलोमीटर प्रति घंटा है।
  • इस हेलिकॉप्‍टर को इस तरह से डिजाइन किया गया है कि यह दुश्‍मन के रडार में नहीं आता है। करीब 16 फुट ऊंचे और 18 फुट चौड़े अपाचे हेलिकॉप्‍टर को उड़ाने के लिए दो पायलट होना जरूरी है।
  • इस हेलिकॉटर से सबसे ख़तरनाक हथियार 16 एंटी टैंक मिसाइल छोड़ने की क्षमता है। इसके नीचे लगी राइफ़ल में एक बार में 30एमएम की 1,200 गोलियाँ भरी जा सकती हैं।
  • यह 550 किलोमीटर ऊंचाई से उड़ सकता है। युद्ध के दौरान यह आपातकाल में एक बार में पौने तीन घंटे तक लगातार उड़ान भर सकता है।

रोमियो हेलिकॉप्टर से सहमें चीन और पाक

  • प्रशांत क्षेत्र में चीन का दखल लगातार बढ़ रहा है। भारत के साथ-साथ यह अमेरिकी चिंताओं में शामिल है। भारतीय नौसेना में इस हेलिकॉप्‍टर के शामिल होने से क्षेत्र में सैन्‍य संतुलन स्‍थापित होगा।
  • रोमियो एमएच 60 को दुनिया का सबसे बेहतरीन मैरीटाइम हेलिकॉप्‍टर माना जाता है। फ‍िलहाल यह अमेरिका नौसेना में एंटी सबमरीन हथियारों के रूप में तैनात किया गया है।
  • यह हेलिकॉप्टरों में सबसे आधुनिक हैं। इसे जंगी जहाज, क्रूजर्स और एयरक्राफ्ट करियर से भी संचालित किया जा सकता है। कठिन हालात में उड़ान भरने के साथ मिसाइल वाहक क्षमता इसे बेहतर बनाती है
  • यह समुद्री जहाज से उड़ने-उतरने और पनडुब्बियों की तलाश में बेहद कारगर है। इस हेलिकॉप्टरों की मदद से भारत की सुरक्षा मजबूत होगी और उसे क्षेत्रीय दुश्मनों से निपटने में मदद मिलेगी।
  • इसके कॉकपिट में दो कंट्रोल हैं। यह सह-पायलट को भी हेलिकॉप्टर का पूरा नियंत्रण देते हैं। सकी तकनीक अंधेरे व तेज धूप में भी कॉकपिट के उपकरणों को देखने में मददगार है।

दुनिया के इन मुल्‍कों में है अपाचे हेलिकॉप्‍टर 

1984 में बोइंग कंपनी ने अमेरिकी फौज को पहला अपाचे हेलिकॉप्‍टर दिया था। बोइंग अब तक कई देशों को यह हेलिकॉप्‍टर बेच चुका है। यह हेलिकॉटर भारत समेत मिस्र, ग्रीस, इंडोनेशिया, इजरायल, जापान, कुवैत, नीदरलैंड, कतर, सऊदी अरब और सिंगापुर की वायु सेना को सौंप चुका है।

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