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टाटा स्‍टील के ठेकेदार ने इस वजह से चुना मौत का रास्‍ता, हलकान करनेवाली है कहानी

जमशेदपुर। टाटा स्टील कंपनी में काम करने वाली ठेका कंपनी मेसर्स स्पेयर केयर के बागबेड़ा निवासी उमेश कुमार पांडेय कर्ज के बोझ के तले दब गए थे। उन पर बैंक का 45 लाख रुपये का कर्ज था। इसकी किस्त समेत कंपनी के कर्मचारियों के वेतन व ईएसआइ व पीएफ के अंशदान के मद में उन्हें कुल साढ़े छह लाख रुपये एक मार्च को देने थे। उनके पास पैसे नहीं थे।

उमेश के स्वजनों की मानें तो कंपनी से भुगतान में देर हो रही थी। बड़े भाई लक्ष्मी की डायलिसिस और इलाज के लिए भी पैसे का जुगाड़ नहीं हो पाने से भी वो परेशान थे। इसी वजह से डिप्रेशन का शिकार उमेश ने टाटा स्टील कंपनी परिसर स्थित स्टाक यार्ड स्थित गोदाम के आफिस में आत्महत्या कर ली। उनकी जेब से पुलिस ने सुसाइड नोट के अलावा पर्स, मोबाइल और चश्मा बरामद किया। उमेश की कंपनी में 42 कर्मचारी काम करते थे।
ये कहते कंपनी के मैनेजर
बकौल कंपनी के मैनेजर नवीन कुमार सिंह के इन कर्मचारियों का पीएफ और ईएसआइ का अंशदान उन्हें ढ़ाई लाख रुपये जमा करना था। इसके अलावा, कर्मचारियों के वेतन मद में भी डेढ़ लाख रुपये देने थे। इसके अलावा, बैंक की किस्त के ढ़ाई लाख रुपये देने का बोझ भी उनके सिर पर था। उमेश के भतीजे सुकेश पांडेय ने बताया कि कंपनी ने दबाव बना कर ढ़ाई लाख रुपये लेकर गोदाम दिया था। स्पेयर केयर कंपनी के कर्मचारियों ने बताया कि इस वजह से उमेश इधर कई दिनों से परेशान थे।
28 को कंपनी बंद करने का कर दिया था एलान 
उमेश की ठेका कंपनी स्पेयर केयर के प्रबंधक नवीन कुमार सिंह ने बताया कि उमेश पांडेय आर्थिक तंगी से इस कदर परेशान थे कि उन्होंने पांच दिन पहले सभी कर्मचारियों को बुला कर कह दिया था कि वो अब कंपनी बंद करने जा रहे हैं। कंपनी चलाने के लिए उनके पास पैसे नहीं हैं। वो 28 फरवरी तक कंपनी बंद कर देंगे।
14 साल पहले खरीदी थी स्पेयर केयर कंपनी 
उमेश के भतीजे सुकेश पांडेय ने बताया कि उनके चाचा ने मेसर्स स्पेयर केयर कंपनी 14 साल पहले दूसरे से खरीदी थी। तब से वो कंपनी चला रहे थे। लेकिन, जब से उन्होंने बैंक से लोन लिया था। उनकी आर्थिक स्थिति खराब होने लगी थी। इसके बाद से ही उन्हें आर्थिक तंगी ने घेर लिया था।
पत्नी से अलग बड़े भाई के साथ रहते थे उमेश 
उमेश पांडेय अपनी पत्नी से अलग मझले भाई लक्ष्मीदत्त पांडेय के साथ रहते थे। उमेश भाइयों में सबसे छोटे थे। उमेश के कोई औलाद नहीं थी। उनके बड़े भाई सुदामा पांडेय की कई साल पहले कैंसर से मौत हो चुकी है।
तीन साल पहले भी की थी खुदकशी की कोशिश 
सुकेश पांडेय ने बताया कि उनके चाचा ने तीन साल पहले भी घर पर खुदकशी की कोशिश की थी। तब सुकेश ने उन्हें फंदे पर लटकते देख लिया था। उन्हें फौरन उतारा था और उन्हें सीपीआर (हार्ट पंपिंग) दिया था। इसके बाद वो बच गए थे।
रोज कार से आते थे, आज स्कूटी से आए 
उमेश कुमार रोज टाटा स्टील कार से आते थे। वो रोज घर से कार से निकल कर करनडीह जाते थे। करनडीह में उनकी कंपनी के जोगिंदर रहते हैं। जोगिंदर उनके करीबी थे जिनसे वो हर बात शेयर करते थे। जोगिंदर को लेकर कंपनी आते थे। लेकिन, मंगलवार को सुबह वो घर से कार पर नहीं बल्कि स्कूटी लेकर निकले थे और बिना जोगिंदर को लिए सीधे टाटा स्टील कंपनी बर्मामाइंस वाले गेट से कंपनी पहुंचे थे।
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