जाफराबाद हिंसा: बच्चे बोले- पापा का क्या कसूर था, जो उनको मार डाला…

नई दिल्ली : जाफराबाद में सोमवार दोपहर उपद्रवियों ने पुलिस और राहगीरों पर गोलियां चलाईं और पत्थराव किया। वाहनों को आग लगा दी। इन सबके बीच जहां दर्जनों पुलिस वाले व राहगीर गंभीर रूप से घायल हो गए। इनमें से एक दिल्ली पुलिस में पिछले 21 साल से अपनी सेवा दे रहे हेड कांस्टेबल रत्न लाल की उपद्रवियों ने सिर पर पत्थर मार-मारकर हत्या कर दी। जो काफी देर तक सड़क पर ही पड़े रहे थे। जिनको तुरंत गुरु तेग बहादुरी अस्पताल में भर्ती कराया गया। डॉक्टरों ने रत्न लाल को मृत घोषित कर दिया। रत्न लाल की पत्थर से मौत हुई या फिर गोली लगने से इसकी अधिकारिक रूप से पुष्टि नहीं की गई है। उनकी मौत के बाद पुलिस जहां गुस्से में है वहीं उनके परिवार में गम का पहाड़ टूट गया है।

1998 में दिल्ली पुलिस में हुए थे तैनात
हेड कांस्टेबल रत्न लाल मूल रूप से सीकर राजस्थान के रहने वाले थे। परिवार में मां, दो भाई मनोज और धर्म पत्नी पूनम, बेटी सिद्दी व कनक और बेटा राम हैं। रत्न लाल पिछले काफी समय से गोकलपुरी एसीपी ऑफिस में तैनात थे। खुशमिजाज और दूसरों की सहायता करने वाले व्यक्ति थे। अपने परिवार और बच्चों के भविष्य ही नहीं बल्कि आसपास रहने वाले बच्चों के बारे में भी वह उनके पेरेंटस से बातचीत करते थे। हेड कांस्टेबल रत्न लाल सुबह नौ बजे हर रोज की तरह घर से बस से ऑफिस गए थे। किसी को नहीं पता था कि जो घर से आज जा रहा है अब कभी वापिस नहीं आएगा।

बच्चों को जब मामले की जानकारी मिली। वह रो-रोकर हर एक व्यक्ति से पूछ रहे थे। पापा का क्या कसूर था। वो तो अपनी डयूटी पर गए थे। उनको क्यों मारा गया। बच्चों के प्रश्नों का किसी के पास कोई जवाब नहीं हैं। वो अपने पापा को देखने की जिद करते रहे। जिनको काफी समझाया कर शांत कराया गया।

मां और पत्नी की हालत बिगड़ी
परिवार को जब मामले की जानकारी मिली तभी से राजस्थान में रहने वाली उनकी बुजुर्ग मां की हालत खराब होने लगी। उनके दोनों भाई तुरंत राजस्थान से दिल्ली के लिए रवाना हो गए। उनकी पत्नी पूनम कई बार बेहोश हो गईं। जिनको अस्पताल ले जाने तक की नौबत आ गई थी। वह भी सभी से पूछ रही हैं कि उनके पति को क्यों मार डाला उनका क्या कसूर था। उन्होंने तो किसी का कोई बुरा नहीं किया।

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