ट्रंप के दौरे से पहले उबाल कहीं साजिश तो नहीं!

नई दिल्ली: अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प भारत के दौरे पर हैं, और उन्हें राजधानी दिल्ली में ठहरना है। उनके आने से महज चंद घंटे पहले जिस तरह से शांत दिल्ली में चौतरफा सीएए के विरोध में प्रदर्शन उग्र हुआ है और लाखों की संख्या में अलग-अलग जगहों पर प्रदर्शनकारी उतर आए हैं, उससे लगता है कि कहीं ये एक सुनियोजित साजिश तो नहीं, सवाल ये उठा है कि जब शाहीनबाग में 71 दिन से प्रदर्शन चल रहा है और उसके अलावा पूरी दिल्ली में कहीं भी सीएए का विरोध नहीं हो रहा, लेकिन बीते शानिवार को एकाएक उत्तर पूर्वी दिल्ली में प्रदर्शन की शुरुआत हुई, उसके बाद रविवार को हिंसा और फिर दिल्ली में 16 जगहों पर प्रदर्शन एक साथ होना किसी बड़ी साजिश को बताता है।

पिछले 24 घंटे के दौरान घटी घटनाओं की कडिय़ों को जोड़कर देखा जाए तो साफ है कि सीएए का प्रदर्शन एकाएक तेजी से नहीं हुआ। सीएए के प्रदर्शन के लिए एक प्लानिंग के तहत योजना बनी और उसके बाद ये ङ्क्षहसा हुई। इस बात से दिल्ली पुलिस भी इत्तेफाक रखती है, लेकिन उनकी इंटेलिजेंस फेल हुई जिसके कारण वे इस पर चुप हैं। सीएए के खिलाफ दोबारा से विरोध-प्रदर्शन शुरू होने की टाइमिंग सबसे ज्यादा देखने वाली है। अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप रविवार शाम 8 बजे तक भारत पहुंचेंगे। सरकार की कोशिश है कि ट्रम्प के सामने भारत की अच्छी छवि बने और यह छवि भारत की आॢथक स्थिति को सुधारने में कारगर साबित हो, लेकिन इसी बीच शुरू हुए प्रदर्शन ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। दोबारा शुरू हुए आंदोलनों में यह बात भी ध्यान देने योग्य है कि ट्रम्प यूपी के आगरा जाएंगे, गुजरात के अलावा दिल्ली भी आएंगे। वहीं आंदोलन के लिए यूपी और दिल्ली को ही चुना गया है।

शाहीन बाग में कोर्ट के वार्ताकारों की विफलतादल्ली के शाहीनबाग में पिछले 71 दिनों से सीएए के विरोध में लोग जमा हैं। प्रदर्शनकारी यहां रोड को जाम करके बैठे हैं, जिससे आम लोगों को काफी परेशानी हो रही है। इन लोगों को समझा-बुझाकर यहां से हटाने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने साधना रामचंद्रन, वजाहत हबीबुल्लाह और संजय हेगड़े को वार्ताकार नियुक्त किया है। इन लोगों में से साधना रामचंद्रन और संजय हेगड़े ने तीन दिनों तक प्रदर्शनकारियों से बातचीत की, लेकिन वह विफल रही। इसी दौरान ये बात सामने आई कि शुक्रवार और शनिवार को शाहीनबाग के प्रदर्शनकारी एक तरफ की रोड खोलने को तैयार हो गए, लेकिन इसी बीच दूसरे गुट ने इससे इंकार कर दिया। जिससे साफ है कि शाहीनबाग में प्रदर्शकारियों के बीच फूट है।

एकाएक कैसे एकत्र हो गए हजारों लोग?
शाहीनबाग के अलावा पूरी दिल्ली शांत थी, लेकिन शानिवार देर रात को उत्तर पूर्वी दिल्ली में मौजपुर-जाफराबाद स्टेशन पर हजारों की संख्या में लोग पहुंचे, जिन्होंने हाथों में तिरंगा लिया हुआ था। इनमें अधिकतर महिलाएं और युवतियां थीं। उनके साथ बच्चे भी थे। पूरी रात करीब 20 हजार से अधिक लोगों ने शांतिपूर्ण प्रदर्शन भी किया। ये प्रदर्शन रविवार शाम 4 बजे तक शाङ्क्षतपूर्वक चला, लेकिन एकाएक उग्र हो गया और हालात इतने बिगड़े कि लाठीचार्ज, आंसू गैस के गोले और पथराव तक हुआ।

शाहीन बाग के कमजोर होते ही भीम आर्मी सक्रिय हुई
शनिवार शाम को शाहीनबाग में रास्ता खुलने की खबर आई तो संकेत मिले की अब यह आंदोलन जल्द ही खत्म हो जाएगा, लेकिन देर शाम तक सोशल मीडिया पर अचानक से भीम आर्मी के भड़काऊ वीडियो आने लगे। रविवार को भीम आर्मी ने भारत बंद का आह्वान कर दिया। जिसके कारण यूपी के अलीगढ़ में बड़े स्तर पर शक्ति प्रदर्शन करने की कोशिश की। वहीं दिल्ली में तो भीम आर्मी ने शाहीनबाग की तर्ज पर सीलमपुर में दोबारा से आंदोलन खड़ा करने की कोशिश की। जाफराबाद में चक्का जाम कर दिया। यहां गौर करने वाली बात यह है कि भीम आर्मी कोई राजनीतिक दल नहीं है। यह संगठन उत्तर प्रदेश के कुछ इलाकों तक सीमित है। ऐसे में सवाल उठता है कि भीम आर्मी ने एक रात में देश के अलग-अलग हिस्सों में इतना बड़ा आंदोलन कैसे खड़ा कर दिया।

दादियों ने कहा, ट्रम्प भी हमारी बातों को सुनें 
शाहीन बाग में लगातार 71वें दिन प्रदर्शन चलता रहा। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि हम लोग चाहते हैं कि सीएए, एनआरसी और एनपीआर के खिलाफ जो प्रदर्शन चल रहा है, उसे अमरीका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प भी समझें और इस पर हमारे प्रधानमंत्री से बात भी करें। वहीं प्रदर्शनकारी दादियों का कहना है कि हमने भी सुना है कि अमरीका के राष्ट्रपति यहां आने वाले हैं। शाहीनबाग एक इंटरनेशनल मुद्दा बन चुका है। ऐसे में हम चाहते हैं कि डोनाल्ड ट्रम्प भारत आ रहे हैं तो वह दिल्ली आकर देखें कि हम लोग 70 दिनों से सड़कों पर बैठे हैं लेकिन हमारी सरकार हमारी मांगें नहीं सुन रही है और हम लोगों से मिलने भी नहीं आई। क्या यह डेमोक्रेसी का सही तरीका है। ऐसे में हम लोग ट्रंप को लेकर ज्यादा तो नहीं सिर्फ यही कहना चाहेंगे की उन्हें भी शाहीन बाग जरूर देखना चाहिए। प्रदर्शनकारी शाहनवाज का कहना है कि इंटरनेशलन मीडिया ने भी हमारे मुद्दे को अच्छे से उठाया है।

कोर्ट के फैसले का इंतजार 
सोमवार को कोर्ट का फैसला आने वाला है। प्रदर्शनकारी मंदीना का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट की तरफ से आए वार्ताकार बातचीत के आधार पर रिपोर्ट बनाकर सुप्रीम कोर्ट को सौंपेंगे, ऐसे में आज आने वाला फैसला हमारे लिए बहुत अहम है। वहीं प्रदर्शनकारियों का कहना है कि हम रोड खाली करने को तैयार हैं, अब देखना यह है कि मध्यस्थता की टीम से आए वार्ताकार हमारी मांग सुप्रीम कोर्ट के सामने रखते हैं या नहीं। कोर्ट अपना फैसला जल्द सुना देती तो हमारे लिए अच्छा होता। अगर सुप्रीम कोर्ट की तरफ से सुरक्षा को पुलिस को आदेश दे देती है, तो हम एक तरफ की रोड खाली करने को तैयार है। मगर यह देखना है कि आज कोर्ट का फैसला क्या होता है।

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