Ramgarh कैथा प्राचीन शिव मंदिर का 350 वर्ष पुराना है इतिहास, दो शिवलिंग की एक साथ होती है पूजा

शिवरात्रि के दिन ऐतिहासिक प्राचीन शिव मंदिर का महत्व और बढ़ जाता है

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Ramgarh:शिवरात्रि के दिन ऐतिहासिक प्राचीन शिव मंदिर का महत्व और बढ़ जाता है, मंदिर में श्रद्धालुओ का तांता लगा रहता है। इस मंदिर में एक साथ होती है दो शिवलिंग की पूजा, कहते हैं सच्चे मन से मांगी गई मुरादे यहां अवश्य पूरी होती है, कोई भी भक्त यहां से खाली हाथ नहीं लौटा है ।

https://youtu.be/o3RMpTpTMo4

यह मंदिर रामगढ़ शहर से 3 किलोमीटर दूर एनएच 23 सड़क किनारे  स्थित है, बताया जाता है कि इस मंदिर का निर्माण पदमा के राजा दलेर सिंह ने 1670 ई. में की थी. यह शिव मंदिर स्थापत्य कला का अद्भुत नमूना है , मंदिर की बनावट मुगल बंगाली, राजपूत, शैलियों का मिश्रण है । दो मंजिले वाला यह ऐतिहासिक  मंदिर जीर्ण शीर्ण अवस्था मे आज भी उसी तरह विराजमान है , जो देखने से किसी किला जैसा प्रतीत होता है । मंदिर परिसर में भगवान भोले के अलावे हनुमान सहित कई देवी देवताओ की प्रतिमा है।

शिवरात्रि के दिन इस मंदिर में दूर दूर से भक्तजन यहां आते है और उमड़ती है श्रद्धालुओं की भाड़ी भीड़ । इस मंदिर परिसर में एक तालाब है जिसका पानी कभी नही सूखता है , गर्मी के मौसम में आस पास के कुआँ, तालाब सब सुख जाते है पर इस तालाब का पानी कभी नही सूखता है , लोग इसे ईश्वर का चमत्कार मानते है , पुजारी की माने तो यहां ईश्वर की ऐसी कृपा है कि  शिवलिंग पर चढ़ने वाला अर्घ्य जल में इतनी शक्ति सम्माहित हो जाती है कि इसकी दो बूंद कान में डालने से बड़ी से बड़ी कान दर्द हो ठीक हो जाती है।

इस मंदिर के ऊपर में गुंम्बद में पानी इकट्ठा होता था जो शिवलिंग पर बून्द बून्द गिरता रहता था , जो अब बंद है। मंदिर में एक गुफा है कहा जाता है कि इसमे काला नाग का निवास स्थान है , जो मिट्टी के प्याले में दूध-लावा और बताशा ग्रहण करने आता है।
कई बार स्थानीय लोगों ने इसे देखा है।

मंदिर के बारे में बताया जाता है कि मंदिर के निचले भाग के अंदर ही अंदर तीन किलोमीटर तक सुरंग है जो राजागढ़ तक जाता है , राज परिवार राजा रानी इस सुरंग के रास्ते से मंदिर के तालाब तक पहुंचते थे , तालाब में  स्नान कर मंदिर में पूजा-अर्चना करते थे अब यह सुरंग बंद है।
रामगढ कैथा का यह ऐतिहासिक मंदिर को सरकार ने तो इसे राष्ट्रीय धरोहर के रूप में घोषित कर दिया है , लेकिन अब तक इस मंदिर का जीर्णोद्धार का काम शुरू नही किया गया है। अगर यह राष्ट्रीय धरोहर  विकसित हो जाती है तो यह एक अच्छी पर्यटक स्थल के रूप में इसकी पहचान बन पाएगी ।

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