मुख्यमंत्री के ट्वीट के बाद जमीन विवाद का मामला पलटा, छोटन ने बताया- HC में 15 वर्षो से लंबित है केस

जदयू नेता ने कहा कि चिरकुडा थाना के पूर्व इंस्पेक्टर मुन्ना प्रसाद गुप्ता तथा सीओ कृष्णा मरांडी ने इस मामले की जांच की थी

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धनबाद। चिरकुंडा थाना क्षेत्र निवासी महिला गीता देवी ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को ट्वीट कर सिद्धनाथ सिंह उर्फ छोटन सिंह पर जबरन कब्जा करने की शिकायत के मामला गर्मा गया है। अब जदयू प्रदेश उपाध्यक्ष सिद्धनाथ सिंह ने प्रेस रिलिज जारी करते हुए बताया कि सरसापहाडी मौजा के रकबा 10 कट्टा खाता संख्या 253 कुमारधुबी स्टेशन रोड स्थित जमीन पर पिछले 15 वर्षो से विवाद चल रहा है।

गीता देवी द्वारा मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को ट्वीट कर लगाया गया आरोप पूरी तरह से बेबुनियाद है। पूर्व में भी ये प्रशासन को इसी तरह परेशान करती आ रही है। पूर्व में गीता देवी ने उक्त विवादित जमीन पर कब्जा करने का प्रयास की थी, जिसे प्रशासन के मदद से रोका गया था। जमीन संबंधी मामला हाईकोर्ट में लंबित है। जिसकी अपील संख्या .592/2017 है।

जदयू नेता ने कहा कि चिरकुडा थाना के पूर्व इंस्पेक्टर मुन्ना प्रसाद गुप्ता तथा सीओ कृष्णा मरांडी ने इस मामले की जांच की थी। जिसके बाद प्रशासन ने दोनों पक्षों को किसी भी तरह से कार्य करने से रोक लगा दिया था। सिद्धनाथ सिंह ने प्रशासन से अपील करते हुए कहा कि कोर्ट का फैसला आने तक मामले को शांत करने का प्रयास करें। वहीं दोनों पक्षों को कागजात के साथ निरसा अंचलाधिकारी एमएन मंसुरी ने सोमवार को बुलाया है।

महिला के ट्वीट पर सीएम ने लिया था संज्ञान : दरअसल गीता देवी ने शनिवार को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को ट्वीट कर अपने जमीन पर सिद्धनाथ सिंह द्वारा जबरन कब्जा करने की शिकायत की। साथ ही मामले की जांच कर जमीन पर दखल दिलाने की मांग की है। इस पर मुख्यमंत्री ने संज्ञान लेते हुए उपायुक्त धनबाद को मामले की जांच कर सूचित करने की बात कही है।

गीता ने जदयू नेता पर लगाया काम में बाधा पहुंचाने का आरोप : गीता देवी ने अपने शिकायत में कहा है कि कुमारधुबी स्टेशन रोड के समीप मेरी जमीन पर कभी भी कुछ करना चाहती हूं तो वहां स्थानीय नेता छोटन सिंह अपने लोगों के साथ आकर मेरे काम में बाधा पहुंचाते हैं। इसकी शिकायत चिरकुंडा थाना में देने के बाद भी मेरा सहयोग नहीं कर रहे है। मैंने इसकी शिकायत पूर्व में 181 पर करके जमीन संबंधी सारे विवरणी दे चुकी हूं। स्थानीय प्रशासन को आदेश भी आया था, लेकिन आज तक कोई कार्रवाई नहीं की गई।

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