भव्य कलश यात्रा के साथ माता वैष्णो देवी मंदिर का 29 वां वार्षिकोत्सव प्रारंभ 

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Ramgarh/News lens:रामगढ़ क्षेत्र के प्रसिद्ध माता वैष्णो देवी मंदिर का 29 वां वार्षिकोत्सव का शुभारंभ गुरुवार को गाजे-बाजे के साथ निकाली गई कलश यात्रा से साथ प्रारंभ हुआ। इस दौरान पूरा शहर जय मातादी के जयकारे से गूंजता रहा।

इस अवसर पर भारी संख्या में महिला श्रद्धालु सिर पर लाल चुनरी ओढ़े हाथों में कलश लेकर चल रही थी। शहर भ्रमण के बाद स्थानीय चट्टी बाजार स्थित श्री सत्यनारायण मंदिर से जल उठाया। कलश यात्रा में सुसज्जित वाहनों पर माता का विशाल चित्र रखा गया था। इसके पीछे स्थानीय कलाकार भजन गाते हुए चल रहे थे। कलश यात्रा में शामिल महिलाएं व श्रद्धालु माता का जयकारा लगाते हुए चल रही थी। कलश यात्रा के आगे श्री श्याम मंडल के कमल बगड़िया एवं ध्रुव सिंह माता का भजन गाते हुए चल रहे थे।

नगर भ्रमण के दौरान कई समाजसेवी संस्थाओं ने कलश यात्रा का स्वागत फल प्रसाद वितरण कर किया। कलश यात्रा के आगे शतचंडी यज्ञ के मुख्य यजमान नंदकिशोर प्रसाद गुप्ता व उनकी धर्मपत्नी सुशीला देवी साथ-साथ चल रही थी। इस अवसर पर मंदिर की संचालक संस्था पंजाबी हिंदू बिरादरी व माता वैष्णो देवी मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष सूरत चंद्र वासुदेवा, महासचिव महेश मारवाह, मनोहर लाल मारवाह, मनजीत साहनी, सुभाष चंद्र मारवाह, रमण मेहरा, विश्वनाथ अरोड़ा, जेके शर्मा, नरेश चंद्र मारवाह, सकत्तर लाल सिल्ली, कैलाश शर्मा, बलवंत राय मारवाह, राजीव चड्ढा सहित बिरादरी के सभी सदस्यों के अलावे श्रद्धालु शामिल थे।

ज्ञात हो कि आज से 29 वर्ष पूर्व शहर के झंडा चौक स्थित माता वैष्णो देवी मंदिर में माता की भव्य प्रतिमा स्थापित की गई थी। लोगों का कहना है कि आज से 29 वर्ष पूर्व काफी आश्चर्यजनक तरीके से माता की प्रतिमा स्थापित हुई थी। लोग बताते हैं कि प्रतिमा स्थापना के वक्त भारी संख्या में लोग प्रतिमा को उठाकर नियत स्थान पर बैठा रहे थे, लेकिन प्रतिमा को लोग उठा नहीं पाये। इसके बाद काशी व अन्य स्थान से आए पंडितों ने काफी अनुष्ठान व धार्मिक क्रियाएं की, इसके बाद एक तेज आवाज हुई और धरती में कंपन हुआ। इसी के साथ प्रतिमा नियत स्थान पर स्थापित हो सकी। आवाज इतनी तेज थी कि इसकी आवाज पूरे रामगढ़ वासियों ने सुनी।

रामगढ़ के लोग इसकी पुष्टि भी करते हैं, इसके बाद प्रत्येक वर्ष प्रतिमा स्थापना की वर्षगांठ मनाई जाती है। मंदिर के गुंबद को 20 फीट तक सोने से मढ़ा गया है। मंदिर के ऊपर सोने का छत्र बनाया गया है। वहीं माता के मंदिर के कपाट व मुख्य द्वार को चांदी से मढ़ा गया है। वर्ष में तीन बार भंडारे का आयोजन ट्रस्ट द्वारा किया जाता है। तीनों भंडारे में लोगों की अपार भीड़ होती है।

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