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किसानों का ऐलान- सरकार नहीं मानी तो लोहड़ी के बाद होली भी यहीं मनाएंगे

कृषि कानूनों को लेकर किसानों और सरकार के बीच कोई हल निकलता दिखाई नहीं दे रहा है। जहां एक तरफ उच्चतम न्यायालय केन्द्र के बर्ताव से खफा है तो वहीं दूसरी तरफ किसान भी पिछे हटते दिखाई नहीं दे रहे हैं। किसानों ने साफ कह दिया है कि अगर सरकार नहीं मानी तो लोहड़ी तो क्या होली भी यहीं मनाएंगे। कृषि कानूनों के खिलाफ सिंघु बॉर्डर पर किसानों का विरोध-प्रदर्शन आज 48वें भी जारी है।

उम्मीद है कोर्ट हमारे पक्ष में सुनाएगी फैसला: किसान
बुराड़ी के निरंकारी समागम ग्राउंड में प्रदर्शन का हिस्सा बने फरीदकोट के ज़िला प्रधान बिंदर सिंह गोले वाला ने बताया कि उम्मीद है कि कोर्ट किसानों के पक्ष में और कानूनों को रद्द करने के लिए कोई फैसला लेगी। हमें बुराड़ी ग्राउंड में करीब 47 दिन हो गए हैं। उन्होंने कहा कि हम सरकार से कहना चाहते हैं कि किसानों की तरफ ध्यान दे। यहां 51-52 लोग मर गए सरकार को उनकी फिक्र नहीं है। वहीं इससे पहले किसान नेताओं ने कहा था कि यदि सरकार अथवा उच्चतम न्यायालय तीन नए कृषि कानूनों को लागू करने पर रोक लगा देता है, तब भी वे अपना आंदोलन जारी रखेंगे। किसान नेताओं ने अपनी ”निजी राय बताते हुए” कहा कि रोक लगाना ”कोई समाधान नहीं” है और वैसे भी यह तय वक्त के लिये होगी।

केन्द्र सरकार से नाराज है उच्चतम न्यायालय 
दरअसल उच्चतम न्यायालय ने  सोमवार को संकेत दिया कि वह विवादित कृषि कानूनों के कार्यान्वयन पर रोक लगा सकता है और मामले का सौहार्दपूर्ण समाधान तलाशने के लिये केन्द्र को और समय देने से इनकार कर सकता है, जिसपर प्रतिक्रिया देते हुए किसान नेताओं ने ये बातें कहीं हैं। अदालत ने कहा कि वह पहले ही केन्द्र सरकार को काफी समय दे चुकी है। हरियाणा भारतीय किसान यूनियन के अध्यक्ष गुरनाम सिंह चढूनी ने कहा कि हम उच्चतम न्यायालय की टिप्पणियों का स्वागत करते हैं, लेकिन प्रदर्शन खत्म करने का कोई विकल्प नहीं है। कोई भी रोक तय समय तक के लिये होगी, उसके बाद फिर यह मामला अदालत में चला जाएगा। उन्होंने कहा कि किसान चाहते हैं कि कानूनों को पूरी तरह वापस लिया जाए। यदि सरकार या उच्चतम न्यायालय कानूनों के कार्यान्वयन पर रोक लगा भी देता है, तब भी आंदोलन चलता रहेगा।

कानूनों पर रोक लगाने का कोई फायदा नहीं: किसान 
भारतीय किसान यूनियन (मनसा) के अध्यक्ष भोग सिंह मनसा ने कहा कि कानूनों पर रोक लगाने का ”कोई फायदा नहीं’ है। हम यहां कानूनों को पूरी तरह निरस्त कराने आए हैं। सरकार यह कहकर पहले ही कानून निरस्त करने पर सहमत हो गई है कि वह किसानों की मांगों के मुताबिक कानूनों में संशोधन करने की इच्छुक है। ” मनसा ने कहा कि हम उच्चतम न्यायालय से इन कानूनों को पूरी तरह निरस्त करने की अपील करते हैं क्योंकि ये संवैधानिक रूप से वैध नहीं हैं। उन्होंने कहा कि आंदोलन तब तक चलता रहेगा ”जब तक इन कानूनों को निरस्त नहीं कर दिया जाता या भाजपा सरकार का कार्यकाल पूरा नहीं हो जाता।’