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सुप्रीम कोर्ट ने किसान आंदोलन पर बनाई 4 सदस्यों की कमेटी, जानें कौन-कौन है शामिल

नई दिल्ली। उच्चतम न्यायालय ने मंगलवार को नए कृषि कानूनों के लागू होने पर रोक लगा दी है। इसके साथ ही साथ ही कोर्ट ने 4 सदस्यों की एक कमिटी का भी गठन किया है। सुप्रीम कोर्ट द्वारा बनाई गई कमेटी में भारतीय किसान यूनियन के भूपेंद्र सिंह मान, सेठारी संस्थान के अनिल घनवंत, कृषि वैज्ञानिक अशोक गुलाटी और अंतर्राष्ट्रीय खाद्य नीति अनुसंधान संस्थान के प्रमोद के. जोशी शामिल हैं। जबतक कमेटी की रिपोर्ट नहीं आती है तबतक कृषि कानूनों के अमल पर रोक जारी रहेगी।

सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश एसए बोबडे, न्यायमूर्ति एएस. बोपन्ना और न्यायमूर्ति वी. रामासुब्रमणियन की पीठ ने कहा कि कोई ताकत उसे नए कृषि कानूनों पर जारी गतिरोध को समाप्त करने के लिए समिति का गठन करने से नहीं रोक सकती तथा उसे समस्या का समाधान करने के लिए कानून को निलंबित करने का अधिकार है। इसके साथ ही न्यायालय ने किसान संगठनों से सहयोग मांगते हुए कहा कि कृषि कानूनों पर  जो लोग सही में समाधान चाहते हैं, वे समिति के पास जाएंगे। यह राजनीति नहीं है। राजनीति और न्यायतंत्र में फर्क है और आपको सहयोग करना ही होगा।

वहीं, सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर किसानों का कहना है कि हम सुप्रीम कोर्ट से विनती करना चाहेंगे कि कानूनों पर रोक नहीं बल्कि कोर्ट को कानूनों को रद्द करने का फैसला करना चाहिए क्योंकि डेढ़ महीना हो गया है सरकार इस पर कुछ सोच नहीं रही है। वजब तक संसद में ये वापस नहीं होंगे हमारा संघर्ष जारी रहेगा।

बता दें कि केंद्र और किसान संगठनों के बीच अबतक आठ दौर की बीतचीत हो चुकि है। सात जनवरी को हुई आठवें दौर की बाचतीच में भी कोई समाधान नहीं निकल सका। केंद्र ने विवादास्पद कानून निरस्त करने से इनकार कर दिया है जबकि किसान नेताओं ने कहना है कि वे अंतिम सांस तक लड़ाई लड़ने के लिये तैयार हैं और उनकी घर वापसी सिर्फ कानून वापसी के बाद ही होगी। केंद्र और किसान नेताओं के बीच 15 जनवरी को अगली बैठक प्रस्तावित है।