Logo
ब्रेकिंग
हाथी का दांत को वन विभाग के अधिकारी ने किया जप्त। नवरात्रि के उपलक्ष में भव्य डांडिया रास का 24 सितंबर को होगा आयोजन । हजारीबाग में 30 फीट गहरी नदी में पलटी बस 07 लोगों की हुई मौत, गैस कटर से काटकर शव को निकाला गया। दो नाबालिग लड़की के दुष्कर्म मामले में फरार दोनो आरोपी को पुलिस ने किया गिरफ्तार। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता शांतनु मिश्रा राजीव गांधी पंचायती राज संगठन के प्रदेश उपाध्यक्ष मनोनीत मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन से राज्य के विभिन्न जिलों से पहुंचे नवनियुक्त जिला परिषद अध्यक्षों ने मुलाक... प्रखंड सह अंचल कार्यालय, रामगढ़ का उपायुक्त ने किया निरीक्षण पल्स पोलियो अभियान का रामगढ़ उपायुक्त ने किया शुभारंभ MRP से ज्यादा में शराब बेचने वालों की खैर नहीं, उपायुक्त ने दिया जांच अभियान चलाने का निर्देश । हेमंत कैबिनेट का बड़ा फैसला- 1932 के खतियानधारी ही झारखंडी,OBC को 27 प्रतिशत आरक्षण, जानें अन्य फैसल...

पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने अपनी आत्मकथा में लिखा, मोदी ने मेहनत से हासिल किया प्रधानमंत्री पद

नई दिल्ली। पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने अपनी आत्मकथा के अंतिम भाग ‘द प्रेसिडेंशियल इयर्स, 2012-2017’ में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ काम करने के अपने अनुभवों को बेबाकी से पेश किया है। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का काम करने का तरीका पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से कैसे अलग रहा। 2014 में मोदी के नेतृत्व में भाजपा की भारी जीत को प्रणब ने जनता की जीत करार दिया।

प्रधानमंत्री मोदी और प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के बीच मूल अंतर को स्पष्ट करते हुए प्रणब ने बताया कि मनमोहन सिंह को सोनिया गांधी ने प्रधानमंत्री बनाया। जबकि संप्रग के घटक दलों ने सोनिया गांधी को प्रधानमंत्री के रूप में चुना था। वहीं मोदी मूल रूप से राजनेता हैं, जिन्हें भाजपा ने चुनाव अभियान शुरू करने से पहले अपना प्रधानमंत्री का उम्मीदवार चुना था। उनके अनुसार मोदी ने प्रधानमंत्री का पद खुद कमाकर हासिल किया।

पीएम के तौर पर मोदी सलाह लेने आते थे लेकिन मनमोहन कभी नहीं आए

मोदी और मनमोहन सिंह दोनों के प्रधानमंत्री रहने के दौरान राष्ट्रपति रह चुके प्रणब के अनुसार प्रधानमंत्री के रूप में मोदी उनके पास विभिन्न मुद्दों पर सलाह लेने के लिए आते थे और वे भी उन्हें सलाह देने में नहीं झिझकते थे। प्रधानमंत्री मोदी कई बार उनकी सलाह से इत्तेफाक नहीं भी रखते थे। लेकिन यह सिलसिला कभी रुका नहीं। वहीं सरकार और पार्टी में लंबे समय तक सहयोगी रहने के बावजूद मनमोहन सिंह कभी किसी मुद्दे पर उनसे सलाह लेने नहीं आए। प्रणब के अनुसार मनमोहन यह जान गए थे कि राष्ट्रपति सिर्फ कैबिनेट की सलाह पर ही काम कर सकता है।

मोदी को विदेशी कूटनीति में एक नई परंपरा की शुरुआत का श्रेय दिया

प्रधानमंत्री मोदी को विदेश नीति की जटिलताओं को बहुत जल्द समझने वाला बताते हुए प्रणब मुखर्जी ने कहा कि 2014 के शपथ ग्रहण समारोह में पाकिस्तान के तत्कालीन प्रधानमंत्री नवाज शरीफ के साथ सार्क देशों के सभी राष्ट्राध्यक्षों को आमंत्रित करने के फैसले पर उन्होंने तत्काल सहमति दे दी थी और उनकी सुरक्षा का व्यापक प्रबंध करने की सलाह दी थी। मुखर्जी ने प्रधानमंत्री के रूप में मोदी को विदेशी कूटनीति में एक नई परंपरा की शुरुआत का श्रेय दिया। इसके तहत राष्ट्रपति के विदेश दौरे से पहले खुद प्रधानमंत्री मोदी उनके पास आकर संबंधित देश से जुड़े मुद्दों पर चर्चा करते थे और बाद में एक पत्र भी भेजा जाता था, जिसमें संबंधित देश के साथ द्विपक्षीय संबंधों पर मूल तथ्य लिखे होते थे।

2014 के आम चुनाव में मोदी की विजय को जनता की जीत बताया

2014 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जीत को असल में जनता की जीत बताते हुए प्रणब मुखर्जी ने अपनी आत्मकथा में स्वीकार किया कि चुनाव के पहले उन्हें भी भाजपा को स्पष्ट बहुमत मिलने का भरोसा नहीं था। उस समय केवल पीयूष गोयल ने भाजपा को कम से कम 265 सीटें मिलने का दावा किया था जो 280 तक पहुंच सकता है। प्रणब मुखर्जी के अनुसार वे पीयूष गोयल के इस आत्मविश्वास के पीछे के कारण को आजतक नहीं समझ सके। लेकिन पीयूष गोयल ने उन्हें मोदी के चुनाव प्रचार का जो ब्योरा दिखाया वो बहुत ही सावधानीपूर्वक रूप से तैयार किया गया था। उसके लिए काफी मेहनत की गई थी। मुखर्जी के अनुसार भाजपा को भारी बहुमत दिलाने में मोदी की तैयारियों और उनकी मेहनत ने उन्हें काफी प्रभावित किया। दूसरी ओर चुनाव के पहले किसी भी कांग्रेसी नेता ने संप्रग या कांग्रेस को स्पष्ट बहुमत मिलने का दावा नहीं किया। मुखर्जी ने स्पष्ट बहुमत मिलने के बावजूद सहयोगी दलों को साथ रखने पर प्रधानमंत्री मोदी की तारीफ भी की।

भाजपा के सामने कांग्रेस देश के किसी भी हिस्से में नहीं ठहर सकी

मुखर्जी के अनुसार 2014 के आम चुनाव में मोदी के नेतृत्व में भाजपा के सामने कांग्रेस देश के किसी भी हिस्से में नहीं ठहर सकी और महज 44 सीटों पर सिमट कर रह गई। भाजपा को मिले स्पष्ट बहुमत के संदर्भ में उन्होंने उसी साल गणतंत्र दिवस समारोह में दिए गए भाषण को याद किया, जिसमें उन्होंने जनता से किसी भी पार्टी को स्पष्ट बहुमत देने की अपील की थी। उनके अनुसार लोग यह कह सकते हैं कि मतदाताओं ने उनका सुझाव मानते हुए नरेंद्र मोदी को सरकार बनाने के लिए स्पष्ट बहुमत दे दिया।