अनामिका के दो आवेदन, पिता अलग, पता गलत, सहारनपुर और बागपत में मुकदमा दर्ज

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मेरठ। कस्तूरबा आवासीय विद्यालय में चल रहे अनामिका प्रकरण में बेसिक शिक्षा विभाग सहारनपुर की बड़ी लापरवाही सामने आई है। नियुक्ति के समय ही अनामिका को लेकर संदेह पैदा हो गया था, दो बार में हुई इस भर्ती में अनामिका ने दोनों बार आवेदन किया था। दोनों ही बार अपने पिता का नाम अलग-अलग दर्शाया था। कागजातों में दर्ज उसका पता भी पत्राचार के पते से भिन्न था। नौकरी के लिये नियुक्ति पत्र उसके घर मैनपुरी भेजा गया था। उसी समय गांव वालों ने साफ कर दिया था कि उक्त नाम-पते का कोई व्यक्ति इस गांव में नहीं है लेकिन शिक्षा विभाग के संबंधित अफसरों ने कथित अनामिका को हाथों हाथ नियुक्ति पत्र देकर नौकरी ज्वाइन करा दी। इसकी पड़ताल नहीं की गई कि आखिर कागजातों में दर्ज तथ्यों में अंतर कैसे है। अब, पेच फंसने के बाद अफसर अधीनस्थों पर दोष लगा रहे हैं। बहरहाल, अब पोल खुलने के बाद सहारनपुर और बागपत दोनों ही जनपदों में अनामिका शुक्‍ला नाम की पूर्णकालिक विज्ञान अध्यापिका के खिलाफ रविवार को प्राथमिकी दर्ज कर ली गई।

अनामिका शुक्ला द्वारा दोनों बार आवेदन किए गए

समग्र शिक्षा अभियान द्वारा संचालित कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय में अगस्त-2019 में हुई नियुक्तियों में शुरू से ही बड़ा झोल रहा। इन नियुक्तियों के लिए पहले सत्र 2018-19 में आवेदन मांगे गए थे। बाद में इन्हीं पदों के लिए सत्र 2019-20 में भी आवेदन मांगे गए। कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय भैसराऊं मुजफ्फराबाद में कार्यरत रही पूर्णकालिका विज्ञान अध्यापिका अनामिका शुक्ला द्वारा दोनों बार आवेदन किए गए। सूत्रों के अनुसार पहले आवेदन में पिता का नाम अलग था, जबकि दूसरे आवेदन में पिता का नाम सुभाष चंद्र शुक्ला अंकित था। अनामिका द्वारा अपना पता लिखा जो जवाबी लिफाफा आवेदन में लगाया गया था, उस पर पिता का नाम आवेदन के नाम से भिन्न था।

गांव में उक्त नाम का कोई व्यक्ति निवास नहीं

विभाग द्वारा जब अध्यापिका को डाक से नियुक्ति पत्र भेजा गया तो वह इस टिप्पणी के साथ लौट आया था कि गांव में उक्त नाम का कोई व्यक्ति निवास नहीं रहता। इसके बावजूद अध्यापिका ने कार्यालय से नियुक्ति पत्र लेकर नौकरी हासिल कर ली। इतना ही नहीं, विभाग में जमा कराए गए प्रमाणपत्र के मूल अभिलेखों के स्थान पर रंगीन फोटो प्रतियां थीं, जबकि नियमानुसार मूल अभिलेख जमा कराए जाने चाहिए थे। यह भी कि बीएसए के संज्ञान में लाए बिना पद संयोजित कर मूल अभिलेखों के अभाव में ही मानदेय जारी करा दिया गया।

शनिवार को रिपोर्ट दर्ज

इस मामले में बीएसए रमेंद्र कुमार सिंह ने कहा कि जिला समन्वयक बालिका शिक्षा आदित्य नारायण शर्मा व कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय मुजफ्फराबाद की वार्डन ललिता को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। वहीं अनामिका शुक्ला के खिलाफ थाना जनकपुरी में शनिवार को रिपोर्ट दर्ज हो गई है। बीएसए के आदेश पर डीसी बालिका आदित्य शर्मा की ओर से अनामिका शुक्ला पुत्री सुभाष चंद निवासी गांव हसनपुर पोस्ट हुमॉयुपुर थाना भौंगाव जिला मैनपुरी के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई गई। डीसी ने तहरीर में लिखा है कि 17 मार्च व चार जून को भेजे पत्र द्वारा अध्यापिका को सभी मूल अभिलेखों व पहचान पत्र के साथ कार्यालय बुलाया गया लेकिन आने के बजाए उसने पांच जून को स्कूल की एक वार्डेन को अपना त्‍यागपत्र वाट्सएप कर दिया।

पैसा गया भी नहीं, …और निकल भी गया

बागपत के बीएसए राजीव रंजन कुमार मिश्र द्वारा बड़ौत कोतवाली में अनामिका शुक्?ला पुत्री सुभाषचंद शुक्ला, अध्यापिका कस्तूरबा विद्यालय बड़ौत (मूल निवासी हसनपुर भोगांव, जनपद मैनपुरी) के खिलाफ आइपीसी धारा 409 व 420 के अंतर्गत दर्ज कराई प्राथमिकी में बताया है कि 31 दिसंबर-2019 को अनामिका की नियुक्ति हुई थी। जनवरी-2020 के मानदेय के लिए अनामिका शुक्ला ने वाट्सएप से अपना बैंक खाता विद्यालय लेखाकार सोनिया रानी को उपलब्ध कराया था। मानदेय हस्तांतरित करते समय त्रुटिवश खाता नंबर गलत हो गया। इससे अनामिका का 22,810 रुपए मानदेय खाते में नहीं जा सका। बाद में सोनिया रानी ने अनामिका शुक्ला द्वारा उपलब्ध कराए बैंक पासबुक की प्रविष्टि देखी तो 18 फरवरी-2020 को कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय से 22,000 रुपए की धनराशि क्रेडिट पाई गई। संदेह होने पर लेखाकार ने डीसी बालिका शिक्षा संगीता शर्मा को अवगत कराया।

13 को अनामिका शुक्ला को  उपस्थित होने के निर्देश

संगीता शर्मा ने मौखिक रूप से इसकी जानकारी बालिका शिक्षा यूनिट राज्य परियोजना कार्यालय लखनऊ को दी। उसके बाद 12 मार्च-2020 को मंडलीय सहायक शिक्षा निदेशक बेसिक, मेरठ ने 13 मार्च-2020 को अनामिका शुक्ला को अपने मूल प्रमाण पत्रों के साथ उपस्थित होने के निर्देश दिए। चूंकि आठ मार्च-2020 को होली पर्व होने के कारण विद्यालय का समस्त स्टॉफ अवकाश पर था इसलिए विद्यालय द्वारा 12 मार्च को कई बार अनामिका शुक्ला के पास फोन किए गए। हालांकि उसने फोन रिसीव नहीं किया। इसके बाद विद्यालय वार्डेन ने अनामिका शुक्ला के वाट्सएप पर 13 मार्च को प्रमाण पत्रों के साथ उपस्थित होने के लिए कहा लेकिन अनामिका शुक्ला ने 13 मार्च को ही डीसी बालिका शिक्षा को वाट्सएप पर ही अपना त्यागपत्र भेज दिया।

अनामिका को ज्वाइन कराने बागपत आया था शिक्षा माफिया

अनामिका प्रकरण के पीछे एक शिक्षा माफिया, गुरुजी का हाथ सामने आ रहा है। अनामिका गुरुजी नाम से ही पुकारती थी शिक्षा माफिया को। बागपत में गुरुजी अनामिका के साथ ही आया था। यहां अनामिका को ज्वाइन कराकर वह लौट गया। अनामिका अक्सर मोबाइल पर गुरुजी से बात करती थी। बागपत की तहसील बड़ौत स्थित कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय में 31 दिसंबर 2019 को जिला मैनपुरी निवासी अनामिका शुक्ला ने विज्ञान विषय की पूर्णकालिक शिक्षिका के रूप में ज्वाइन किया था।

अनामिका के साथ एक शख्स भी आया

विद्यालय स्टाफ के अनुसार उस समय अनामिका के साथ एक शख्स भी आया था, जिसे अनामिका गुरुजी कहकर पुकार रही थी। गुरुजी ने विद्यालय में लखनऊ सचिवालय तक अपनी पहुंच होने की डींग मारी थी। नाम न छापने की शर्त पर एक शिक्षिका ने बताया कि अनामिका अक्सर मोबाइल पर गुरुजी से बात करती थी।

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