केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा, कोरोना महामारी के खिलाफ रणनीति को दुरस्त कर रही सरकार

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नई दिल्ली। सरकार ने रविवार को कहा कि कोविड-19 नई बीमारी है, जिसके बारे में पूरी जानकारी नहीं है। इसके साथ ही सरकार ने लॉकडाउन लागू करने के समय का बचाव किया है। इसने मीडिया की उन खबरों को आधारहीन बताते हुए सिरे से खारिज कर दिया, जिनमें कहा गया था कि कोविड-19 के खिलाफ रणनीति बनाने में विशेषज्ञों की राय नहीं ली जा रही है। सरकार ने यह भी कहा कि वह सामने आ रही जानकारी और जमीनी अनुभवों के आधार पर कोविड-19 के खिलाफ रणनीति को दुरस्त कर रही है।

स्वास्थ्य मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि मीडिया का एक धड़ा महामारी से लड़ने को लेकर भारत के फैसलों पर खबरें दे रहा है। मंत्रालय ने जोर दिया कि कोविड-19 के मामलों में तेजी से वृद्धि की पृष्ठभूमि में लॉकडाउन का फैसला किया गया।

मंत्रालय ने कहा कि संक्रमित मामलों के दोगुना होने की दर निम्न स्तर पर है जिसके बढ़ने से अधिक मामले सामने आए और मृत्यु दर बढ़ने का खतरा था जैसा कई पश्चिमी देशों ने अनुभव किया। कोविड-19 मरीजों में अप्रत्याशित बढ़ोतरी से स्वास्थ्य सेवा के धराशायी होने की आशंका वास्तविकता हो जाती।

सरकार ने राहुल गांधी के आरोपों को किया खारिज

वहीं, दूसरी ओर कोरोना के खिलाफ जंग में भारत विकसित देशों से आगे रहा है। लॉकडाउन के पूरी तरह विफल रहने के कांग्रेस नेता राहुल गांधी के आरोपों को नकारते हुए सरकार ने यह दावा किया है। मजेदार बात यह है कि सरकार और विपक्ष का आरोप-प्रत्यारोप सिर्फ ट्वीट के जरिये हो रहा है। राहुल के आरोपों का उन्हीं के तरीके से जवाब देते हुए केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने बताया कि लॉकडाउन की वजह से भारत में दुनिया के दूसरे देशों की तुलना में न सिर्फ कम लोगों को संक्रमण हुआ, बल्कि इससे मरने वालों की संख्या भी बहुत कम रही है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने उन्हीं चार देशों में कोरोना संक्रमण और उससे होने वाली मौत का आंकड़ा दिया, जिनके आंकड़ों का इस्तेमाल लॉकडाउन को विफल साबित करने के लिए किया गया था।

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