चंद्र ग्रहण स्पर्श आरंभ, जानें- क्या करें और क्या नहीं

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नई दिल्ली। Lunar Eclipse Timings in India साल का दूसरा चंद्र ग्रहण शुरू हो गया। यह ग्रहण वास्तविक चंद्र ग्रहण न होकर एक उपछाया चंद्र ग्रहण है। उपछाया चंद्र ग्रहण को धार्मिक लिहाज से बहुत ज्यादा मान्यता नहीं दी जाती है। हालांकि, ग्रहण के दौरान थोड़ी बहुत सावधानियां रखनी चाहिए। चंद्र ग्रहण 11 बजकर 15 मिनट से शुरू हुआ है और रात में 2 बजकर 34 मिनट पर खत्म होगा। ग्रहण रात 12:54 बजे अपने अधिकतम प्रभाव में हो सकता है। ज्येष्ठ पूर्णिमा के दिन लगा ये ग्रहण जाने कहां-कहां दिखाई देगा और भारत में इसका कितना असर होगा।

इस चंद्रग्रहण में सूतक काल भी मान्य नहीं होता

उपछाया चंद्र ग्रहण बहुत अधिक प्रभावशाली नहीं होता है, इस दौरान सूतक काल भी मान्य नहीं होता है। ग्रहण एशिया, यूरोप, ऑस्ट्रेलिया और अफ्रीका के लोग देख पायेंगे। हालांकि ये उपच्छाया चंद्र ग्रहण होने के कारण सामान्य चांद और ग्रहण में अंतर कर पाना मुश्किल होगा। ग्रहण के समय चंद्रमा के आकार में कोई परिवर्तन नहीं आयेगा। बल्कि इसकी छवि कुछ मलिन हो जायेगी। यानी चांद इस दौरान मटमैला सा दिखाई देगा।

ज्योतिष अनुसार उपच्छाया चंद्र ग्रहण का सूतक काल मान्य नहीं होता। क्योंकि इसे वास्तविक ग्रहण नहीं माना गया है। ज्योतिष में उसी ग्रहण को गंभीरता से लिया जाता है जिसे खुली आंखों से देखा जा सके। 10 जनवरी को भी ऐसा ही चंद्र ग्रहण लगा था।

ग्रहण काल के दौरान क्या ना करें

इस बार का ये चंद्र ग्रहण उपछाया चंद्र ग्रहण है। शास्त्रों में उपछाया चंद्र ग्रहण को ग्रहण नहीं माना जाता है। इसलिए इस ग्रहण में ना तो सूतक काल और ना ही किसी तरह के धार्मिक कार्यों पर प्रतिबंध लगा है। इस ग्रहण काल में चिंता करने की कोई बात नहीं है। ग्रहण काल के दौरान रात में जगे रहने की भी जरूरत नहीं है।

ग्रहण काल में क्या करें

ग्रहण काल के दौरान भगवान शिव की चालीसा का पाठ करें और ऊं नम: शिवाय के मंत्रों का जाप करें. आप जितनी भगवान शिव की पूजा करेंगे, आपको उतना ही लाभ होगा। ग्रहणकाल के दौरान बुजुर्गों और छोटे बच्चों पर विशेष ध्यान दें।

जानिए- क्या होता है उपछाया चंद्र ग्रहण

चंद्रग्रहण एक खगोलीय घटना है। जो तब घटित होती है जब चंद्रमा पृथ्वी के ठीक पीछे उसकी प्रच्छाया में आ जाता है। ऐसा तभी हो सकता है जब सूर्य, पृथ्वी और चंद्रमा इस क्रम में लगभग एक सीधी रेखा में स्थित रहें। तो वहीं उपच्छाया चंद्र ग्रहण तब लगता है जब पृथ्वी की परिक्रमा करने के दौरान चंद्रमा पेनुम्ब्रा से हो कर गुजरता है। ये पृथ्वी की छाया का बाहरी भाग होता है। इस दौरान, चंद्रमा सामान्य से थोड़ा गहरा दिखाई देता है।

चंद्र ग्रहण के दौरान बरते जानी वाली सावधानियां…

सूतक काल के दौरान किसी भी तरह का शुभ कार्य शुरू नहीं किया जा सकता है। – जब भी सूतक लगता है तो उस दौरान भगवान की मूर्तियों न तो छुआ जाता और न ही पूजा होती है। इस दौरान मंदिर के कपाट बंद कर दिए जाते हैं।- सूतक के समय भगवान का ध्यान और मंत्रों का जप करने से ग्रहण का अशुभ प्रभाव कम हो जाता है।- सूतक काल में गर्भवती महिलाओं को घर से बाहर नहीं निकलना चाहिए।

 गर्भवती महिलाओं को इन बातों का रखना चाहिए ध्यान(Chandra Grahan Precaution For Pregnant Ladies:)

धार्मिक मन्यताओं अनुसार सूर्य ग्रहण और चंद्र ग्रहण दोनों ही अशुभ माने गये हैं। जिनका प्रभाव लंबे समय तक रहता है। 5 जून में ज्येष्ठ पूर्णिमा के दिन चंद्र ग्रहण लगने जा रहा है। चंद्र ग्रहण के दौरान बहुत से कार्य वर्जित होते हैं। कहा जाता है कि इस दौरान नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव काफी ज्यादा रहता है। इसलिए कुछ सावधानियां बरतने की जरूरत पड़ती है। खासकर गर्भवती महिलाओं को ग्रहण के समय ज्यादा सतर्क रहना होता है। जिससे ग्रहण का बुरा प्रभाव गर्भ में पल रहे बच्चे पर न पड़ सके।

भारत में इस तरह दिखाई देगा चंद्र ग्रहण

उपछाया चंद्र ग्रहण होने के कारण चंद्रमा के आकार में किसी भी तरह का कोई भी परिवर्तन देखने को नहीं मिलेगा। इसमें रात को चंद्रमा की एक धुंधली सी तस्वीर नजर आएगी

चंद्र ग्रहण को लेकर विदेशों में मान्यताएं

चंद्रग्रहण से जुड़ी कई मान्यताएं भी हैं। दुनिया भर के देशों में इससे जुड़ी कई दिलचस्प मान्यताएं हैं। जैसे अमेरिका स्थित इन्का साम्राज्य के लोगों का मानना है कि चंद्रग्रहण के दिन एक तेंदुआ चांद पर हमला करता है, और इसी कारण चंद्रग्रहण के दौरान चांद का रंग लाल हो जाता है। यहां के लोग ये भी मानते हैं कि यही तेंदुआ पृथ्वी पर भी आता है और इसे खाने की कोशिश करता है। इसलिए वे तेंदुए से बचने के लिए भालों का प्रयोग करते हैं और जोर जोर से आवाज निकालते हैं। इसके अलावा वहां के लोग अपने कुत्ते को भी पीटते हैं, ताकि उनकी आवाज सुनकर तेंदुआ भाग जाए।

क्या खुली आंखों से ग्रहण देख सकते हैं? (Is lunar eclipse safe to watch)

एक्सपर्ट्स का मानना है कि चंद्र ग्रहण के दौरान या चंद्र ग्रहण को सीधे तौर पर देखना, आपकी आंखों को किसी भी तरह से नुकसान नहीं पहुंचाता। जबकि, सूर्य ग्रहण को नंगी आंखों से देखने पर यह आपकी आंखों को नुकसान पहुंचा सकता है। हमेशा सूर्यग्रहण को खास सोलर फिल्टर वाले चश्मों से देखें। इन्हें सोलर-व्युइंग ग्लासेस, पर्सनल सोलर फिल्टर्स या आइक्लिप्स ग्लासेस कहा जाता है। आपके नॉर्मल चश्मे या गॉगल्स आंखों को यूवी रेज़ से सुरक्षित नहीं रख सकते।

कहां-कहां दिखेगा चंद्र ग्रहण (Chandra Grahan 2020)

यह चंद्र ग्रहण एशिया, ऑस्ट्रेलिया, यूरोप और अफ्रीका में दिखाई देगा। यह एक पेनुमब्रल चंद्र ग्रहण होगा जिसमें आमतौर पर एक पूर्ण चंद्रमा से अंतर करना मुश्किल होता है। इस चंद्र ग्रहण की कुल अवधि 3 घंटे 18 मिनट होगी. चंद्र ग्रहण 5 जून को रात 11:16 बजे से शुरू होगा। रात 12:54 बजे सबसे ज्यादा असर दिखाई देगा और 06 जून 02:32 बजे समाप्त हो जाएगा।

उपछाया चंद्रग्रहण में सूतक काल मान्य नहीं होता

उपछाया चंद्रग्रहण की इस घटना को नग्न आंखों के द्वारा देखा जा सकता है। यह ग्रहण बहुत अधिक प्रभावशाली नहीं होता है. इस दौरान सूतक काल भी मान्य नहीं होता है।

अगले महीने फिर लगेगा चंद्रग्रहण

इस साल दो और चंद्रग्रहण लगेंगे। वे 5 जुलाई और 30 नवंबर को होंगे। इससे पहले इसी साल 10 जनवरी को भी चंद्रग्रहण लगा था।

देर तक देखा जा सकता है चंद्रग्रहण

चंद्रग्रहण को पृथ्वी के रात्रि पक्ष के किसी भी भाग से देखा जा सकता है। जहाँ चंद्रमा की छाया की लघुता के कारण सूर्यग्रहण किसी भी स्थान से केवल कुछ मिनटों तक ही दिखता है, वहीं चंद्रग्रहण की अवधि कुछ घंटों की होती है।

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