चीन की नई चाल, भारतीयों को वापस लाने वाले विमान को नहीं दे रहा मंजूरी

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कोरोना वायरस के संकट से जूझ रहा चीन अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रहा है। चीन जानबूझकर कोरोना वायरस से प्रभावित लोगों के लिए राहत सामग्री लेकर और वुहान में रह रहे भारतीयों को वापस लाने के लिए भारतीय वायु सेना का विमान भेजने के भारत के प्रस्ताव को मंजूरी देने में देरी कर रहा है। भारत ने इस बात पर रोष जताया है।

भारत को कोरोना वायरस से सबसे अधिक प्रभावित चीनी शहर वुहान में 20 फरवरी को सी-17 सैन्य विमान भेजना था लेकिन उड़ान के लिए अनुमति न मिलने के कारण विमान उड़ान नहीं भर सका। भारत ने शनिवार कहा कि वुहान में कोरोना विषाणु की महामारी से निपटने के लिए चिकित्सा एवं राहत सामग्री वाले विमान को दो दिन के इंतजार के बाद भी चीन सरकार की ओर से वहां आने की अनुमति नहीं मिली है। चीन सरकार ने कहा था कि विमान को अविलंब अनुमति दी जायेगी। शुक्रवार को विमान को रवाना होना था लेकिन दो दिन के इंतजार के बाद भी अनुमति नहीं मिली है। सूत्रों ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग को पत्र लिखकर इस त्रासदी को लेकर भारत की सरकार एवं जनता की ओर से एकजुटता व्यक्त की और चीन की आवश्यकता अनुसार सहायता की पेशकश की थी।

भारत सरकार ने अपने वचन के अनुरूप और भारत-चीन राजनयिक संबंधों की 70वीं वर्षगांठ पर चीन की जनता के प्रति एकजुटता की भावना से चिकित्सा एवं राहत सामग्री भेजने का निर्णय लिया। विमान में भेजी जाने वाली सामग्री में दस्ताने, सर्जिकल मास्क, फीडिंग और इन्फ्यूजन पंप तथा डिफिब्रिलेटर शामिल हैं जिसकी चीन की तरफ से आवश्यकता बताई गई थी। इस बीच वुहान में भारतीय नागरिकों को स्वदेश लौटने के लिए विमान का बहुत लंबा इंतजार करना पड़ रहा है। इस विलंब से उनको और भारत में उनके परिवारों को बहुत मानसिक तनाव से गुजरना पड़ रहा है।

अन्य देशों से चिकित्सा एवं राहत सामग्री लाने वाले और अपने नागरिकों को निकालने वाले विमान आ-जा रहे हैं। सूत्रों ने सवाल किया कि आखिर चीन सरकार विमान को अनुमति देने में विलंब क्यों कर रही है। क्या वह भारत की सहायता लेने की इच्छुक नहीं है। उन्होंने यह भी पूछा है कि चीन से भारत के लोगों की वापसी को क्यों बाधित किया जा रहा है जो इस समय बेहद कठिनाइयों और मानसिक तनाव का सामना कर रहे हैं।

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