मिसाइलों के निर्यात से भारत अपने उन मित्र देशों को मजबूत करना चाहता है जिन पर चीन हेकड़ी दिखाता है

हाल में मोदी सरकार ने सतह से हवा में मार करने वाली आकाश मिसाइल सिस्टम के निर्यात का फैसला किया है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के अनुसार आकाश मिसाइल का निर्यात किया जाने वाला संस्करण भारतीय सेनाओं के पास मौजूद संस्करण से अलग होगा। सर्वविदित है कि भारत अपनी रक्षा जरूरतों को दूसरे देशों की मदद से पूरा करता आ रहा है, परंतु अब वह अन्य देशों को अपनी आधुनिक मिसाइलों को बेचेगा भी। मिसाइल प्रौद्योगिकी नियंत्रण व्यवस्था (एमटीसीआर) का सदस्य बनने के बाद भारत के लिए यह काम आसान हो गया है। आकाश मिसाइल को वायु सेना में वर्ष 2014 में और थल सेना में वर्ष 2015 में शामिल किया गया था। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) द्वारा विकसित आकाश मिसाइल की तकनीक एवं विकास 96 प्रतिशत स्वदेशी है। पिछले दिनों विश्व के जिन देशों में रक्षा प्रदर्शनियां आयोजित हुई हैं उनमें आकाश मिसाइल को लेकर कई देशों ने रुचि दिखाई है। शायद इसी वजह से इस मिसाइल के निर्यात को सरकार द्वारा स्वीकृति प्रदान की गई है। उसने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि भारत आकाश मिसाइल केवल उन्हीं देशों को बेचेगा जिनसे उसके बेहतर एवं मैत्रीपूर्ण संबंध हैं।

मोदी सरकार रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देना चाहती है

मोदी सरकार रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देना चाहती है। इसीलिए वह बड़े पैमाने के रक्षा निर्यात पर अपना ध्यान केंद्रित कर रही है। सरकार चाहती है कि भारत का रक्षा निर्यात पांच अरब डॉलर तक सालाना हो जाए। उसने इसे पूरा करने के लिए एक समिति का भी गठन किया है, ताकि विभिन्न देशों में रक्षा निर्यात की संभावनाओं को तलाशा जा सके। अभी तक दुनिया के रक्षा बाजार में भारतीय निर्यात काफी कम है। निश्चित रूप से आकाश मिसाइल की बिक्री से वैश्विक रक्षा बाजार में भारत की भागीदारी बढ़ जाएगी। फिलहाल आकाश मिसाइल की खरीद में दक्षिण एशिया के नौ देशों एवं अफ्रीकी मित्र देशों ने रुचि दिखाई है। कुछ मित्र देशों ने आकाश मिसाइल के अतिरिक्त तटीय निगरानी प्रणाली, रडार तथा एयर प्लेटफॉर्म को भी खरीदने में अपना रुझान दिखाया है। इनमें हल्के लड़ाकू विमान, हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइलें, सतह से सतह पर मार करने वाली मिसाइलें, सुपरसोनिक क्रूज मिसाइलें आदि शामिल हैं। भारत सरकार ने 2025 तक 35,000 करोड़ रुपये के रक्षा उत्पाद निर्यात करने का लक्ष्य रखा है।

रक्षा निर्यात के जरिये मित्र देशों के साथ रणनीतिक संबंधों को बेहतर बनाना है

रक्षा उत्पादन निर्यात संवर्धन नीति-2020 का मकसद रक्षा निर्यात के जरिये मित्र देशों के साथ रणनीतिक संबंधों को बेहतर बनाना है। अब तक भारतीय रक्षा निर्यातों में पुर्जे या घटक आदि शामिल थे और बड़े उपकरणों का निर्यात न्यूनतम था। अब सरकार की इस पहल से देश को अपने रक्षा उत्पादों को बेहतर बनाने और उन्हेंं विश्व स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनने में मदद मिलेगी

चीन की आक्रामकता की वजह से प्रभावित मित्र देशों को मजबूत करना चाहता है भारत 

गौरतलब है कि भारत अपने उन मित्र देशों को मजबूत करना चाहता है जो चीन की आक्रामकता की वजह से अधिक प्रभावित हैं। इन चीन विरोधी देशों को भारत एक-एक कर नई मिसाइलों से लैस कर उन्हें ताकतवर बनाने की नीति पर काम कर रहा है। इस तरह से भारत हिंद प्रशांत क्षेत्र में चीनी खतरे को जड़ से समाप्त करने के प्रयास में लगा हुआ है। वियतनाम सहित दक्षिण पूर्व एशिया के अधिकांश देश दक्षिण चीन सागर पर चीन की दबंगई को खुलेआम चुनौती दे रहे हैं। फिलीपींस तो अब चीन को साफ शब्दों में कह चुका है कि वह उसके किसी भी दुस्साहस पर उससे उसी ढंग से निपटेगा। ऐसे देशों को भारतीय मदद उन्हें और ताकतवर बनाएगी। आकाश मिसाइल का वजन 720 किलोग्राम है और इसकी लंबाई 19 फीट है। यह 60 किलोग्राम के भार वाले हथियारों को ले जाने में सक्षम है। इसकी मारक क्षमता 40 से 60 किलोमीटर तक की है। यह मिसाइल 4321 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से उड़ान भरती है। यानी एक सेकेंड में 1.20 किलोमीटर। दुश्मन जब तक इसको रोकने का प्रयास करेगा तब तक यह उसे मार कर नेस्तनाबूद कर देगी। इसको एंटी मिसाइल के तौर पर भी उपयोग में लाया जा सकता है।

ब्रह्मोस मिसाइल सिस्टम को भी खरीदने में कई देशों ने रुचि दिखाई

इसके अलावा भारत-रूस के संयुक्त प्रयास से निर्मित ब्रह्मोस मिसाइल सिस्टम को भी खरीदने में कई देशों ने रुचि दिखाई है। वियतनाम चीन से बचाव के लिए इसे खरीदना चाहता है। इस अत्याधुनिक मिसाइल सिस्टम को बेचने के लिए भारत की नजर में वियतनाम के अतिरिक्त 15 अन्य देश भी हैं। वियतनाम के बाद फिलहाल जिन देशों से बिक्री की बातचीत चल रही है उनमें इंडोनेशिया, दक्षिण अफ्रीका, चिली, ब्राजील, फिलीपींस, मलेशिया, थाईलैंड और संयुक्त अरब अमीरात हैं। उल्लेखनीय है कि इन सभी देशों के साथ दक्षिण चीन सागर मसले पर चीन के साथ तनातनी चल रही है।

ब्रह्मोस मिसाइल सर्वाधिक खतरनाक एवं प्रभावी शस्त्र प्रणाली है, रडार की पकड़ में नहीं आती

दुनिया की सबसे तेज गति वाली मिसाइलों में शामिल ब्रह्मोस मिसाइल सर्वाधिक खतरनाक एवं प्रभावी शस्त्र प्रणाली है। यह न तो रडार की पकड़ में आती है और न ही दुश्मन इसे बीच में भेद सकता है। एक बार दागने के बाद लक्ष्य की तरफ बढ़ती इस मिसाइल को किसी भी अन्य मिसाइल या हथियार प्रणाली से रोक पाना असंभव है। 300 किलोग्राम वजन के हथियार को ले जाने में सक्षम इस मिसाइल को मोबाइल करियर से भी लांच किया जा सकता है। ब्रह्मोस मिसाइल का परीक्षण पोखरण क्षेत्र में कई बार किया जा चुका है। हाल में इस मिसाइल में कुछ सुधार कर इसकी क्षमता को भी बढ़ाया गया है। इसे समुद्र और सतह के साथ हवा से भी दागा जा सकता है। इसकी अधिकतम गति 2.8 मैक अर्थात ध्वनि की गति से लगभग तीन गुनी अधिक है। कुल मिलाकर सरकार के इस निर्णय के बाद रक्षा जगत में भारत का रुतबा पूरी दुनिया में बढ़ जाएगा। इससे भारत को दुनिया में स्वयं को एक महाशक्ति के रूप में स्थापित करने में मदद मिलेगी।

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