अमेरिकी अंतरराष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता आयोग की टीम को भारत ने वीजा देने से किया इनकार, जानें क्‍यों

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नई दिल्ली। सरकार ने अमेरिकी अंतरराष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता आयोग (यूएससीआइआरएफ) की टीम को वीजा देने से इन्कार कर दिया है। यह टीम भारत में धार्मिक स्वतंत्रता का आकलन करने के लिए आना चाहती थी। सरकार ने साफ कर दिया है कि भारतीयों के संविधान संरक्षित अधिकारों पर किसी विदेशी संस्था को बोलने का हक नहीं है।

विदेश मंत्री एस जयशंकर ने भाजपा सांसद निशिकांत दूबे को लिखे पत्र में उक्त बातें कही है। दूबे ने पिछले साल लोकसभा में नागरिक संशोधन बिल पास होने के बाद यूएससीआइआरएफ द्वारा गृह मंत्री अमित शाह पर पाबंदी लगाने की मांग के मुद्दे उठाया था। इसके अलावा बुधवार को जारी अमेरिका की आधिकारिक ‘2019 अंतरराष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता रिपोर्ट’ में भी भारत में अल्पसंख्यकों के खिलाफ हमलों और भेदभाव पर चिंता जताई गई है।

विदेश मंत्री ने कहा कि यूएससीआइआरएफ को भारत में धार्मिक स्वतंत्रता को लेकर भ्रामक, पक्षपाती और गलत सूचनाएं फैलाने के लिए जाना जाता है। उन्होंने कहा कि हम इस तरह की संस्थाओं की बातों को तवज्जो नहीं देते। विदेश मंत्रालय संस्था की टिप्पणी को गलत और अवांछित करार देता है।

जयशंकर ने कहा, ‘हमने यूएससीआइआरएफ की टीम को वीजा देने से इन्कार कर दिया है, जो धार्मिक स्वतंत्रता के मुद्दे को लेकर आना चाहती थी। हमें नहीं लगता कि भारत के नागरिकों को संविधान से मिले अधिकारों पर बोलने का हक यूएससीआइआरएफ जैसी किसी विदेशी संस्था को है।’ वहीं, बुधवार को अमेरिकी विदेश मंत्री माइक पोंपियो द्वारा जारी धार्मिक आजादी संबंधी रिपोर्ट में जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 को हटाने के साथ ही सीएए कानून का भी जिक्र किया गया है।

इस मुद्दे पर भारत ने पहले ही अंतरराष्ट्रीय समुदाय के सामने अपना मत स्पष्ट कर चुका है। भारत का स्पष्ट कहना है कि अनुच्छेद 370 को खत्म करना उसका आंतरिक मामला है। जबकि, सीएए पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान में धार्मिक आधार पर सताए गए हिंदू, सिख, ईसाई, पारसी, जैन और बौद्धों के लिए नागरिकता सुनिश्चित करता है।

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