राहुल गांधी और राजीव बजाज की चर्चा में निशाने पर रहा लॉकडाउन, जानें और किस-किस पर निशाना साधा

नई दिल्ली। अलग-अलग व्यक्तित्व से चर्चा के क्रम में गुरुवार को कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने बजाज ऑटो के एमडी राजीव बजाज से संवाद किया और दोनों का मानना था कि लॉकडाउन कोरोना का तो कुछ नहीं बिगाड़ पाया लेकिन अर्थव्यवस्था जरूर तबाह हो गई है। वास्तव में कोरोना का कर्व नीचे लाने की जगह लॉकडाउन ने अर्थव्यवस्था का कर्व नीचे ला दिया है। लोगों के मन में भय के माहौल की वजह से बोलने में हिचकिचाहट की बात उठाते हुए बजाज ने कहा कि कारोबार ही नहीं हर दृष्टि से खुलेपन का माहौल भरोसा पैदा करता है। इसलिए सहिष्णु और संवेदनशील होने के मसले पर भारत में कुछ पहलुओं में सुधार की जरूरत है।

भारत ने पूर्वी देशों की ओर देखने के बजाय पश्चिम की ओर देखा 

कांग्रेस के सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर गुरुवार को प्रसारित इस संवाद में बजाज ने कहा कि एशियाई देश होने के बावजूद भारत ने जापान, सिगापुर या दक्षिण कोरिया की ओर देखने के बजाय अमेरिका और यूरोपीय देशों से भी आगे चला गया। राहुल गांधी ने कहा कि वे इसे फेल लॉकडाउन इसीलिए कहते हैं कि जब कोरोना के मामले तेजी से बढ़ रहे तब लॉकडाउन खुल रहा और इस बीच अर्थव्यवस्था और रोजगार चौपट हो गए हैं।

लोगों के हाथों में सीधी मदद जाने से ही यह बदलाव होगा

अर्थव्यवस्था को संकट से उबारने के सवाल पर बजाज ने कहा कि मांग बढ़ाए बिना यह संभव नहीं और कुछ ऐसी पहल करनी होगी, जो लोगों के मनोबल व मूड को बदले। 20 लाख करोड़ के आर्थिक पैकेज के इस दिशा में नाकाफी होने का इशारा करते हुए बजाज ने कहा कि लोगों के हाथों में सीधी मदद जाने से ही यह बदलाव होगा। दुनिया में कई देशों की सरकारों ने संकट समाधान के लिए जो मदद दी है, उसमें 90 फीसद सीधी आर्थिक मदद है जबकि हमारे यहां केवल 10 फीसद लोगों को ही सीधी मदद मिल पाई है।

उत्साह और आत्मविश्वास के बिना देश में कोई निवेश नहीं करेगा

राहुल गांधी ने कहा कि जब उनके एक मित्र को उन्होंने राजीव बजाज से अगली बातचीत की जानकारी दी तो उसने कहा बंदे में दम है। वहीं, बजाज ने कहा कि उत्साह और आत्मविश्वास के बिना देश में कोई निवेश नहीं करेगा। इसलिए हमें सहिष्णु और संवदेनशील होने के मामले में कुछ चीजों को सुधारने की आवश्यकता है।

उन्होंने कहा कि जो लोग बोलने से डरते हैं उनमें से काफी के पास छिपाने के लिए कुछ है और कारोबारी भी दूध के धुले नहीं हैं। यह भी स्वीकार करना चाहिए कि यूपीए- दो और राजग -एक के दौरान बहुत सारे ऐसे घपले सामने आए जिसकी वजह से कई लोग मेरे पिता राहुल बजाज और मेरी तरह बोलने का जोखिम नहीं उठा पाते हैं।

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