किश्तवाड़ में सेना को मिली बड़ी कामयाबी हिजबुल का आतंकी ठिकाना ध्वस्त, हथियार, गोला बारूद और युद्ध के सामान बरामद

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श्रीनगर किश्तवाड़ इलाके में सेना व पुलिस ने हिजबुल मुजाहिदीन का आतंकवादी ठिकाना ध्वस्त करके एक बड़ी कामयाबी हासिल की है। किश्तवाड़ में स्थित 17 राष्ट्रीय राइफल के जवानों को यह सूचना मिली थी कि इलाके में हिजबुल मुजाहिदीन के आतंकवादियों ने कुछ हथियार छिपा रखे हैं। इसी के चलते राष्ट्रीय राइफल के जवानों ने पुलिस को साथ लेकर सर्च ऑपरेशन शुरू किया। गुफा के अंदर तलाशी लेने के बाद कुछ हथियार और गोला बारूद बरामद हुआ है, जिसमें एक एके 56 राइफल, उसकी 27 गोलिया, एक ग्रेनेड लांचर, एक 9 एमएम की पिस्तौल, उसकी एक मैगजीन, जिसमें छह गोलिया मौजूद थीं, को बरामद किया है। इसके चलते सुरक्षाबलों ने एक बड़ी कामयाबी हासिल की है।

 

जानकारी के अनुसार किश्तवाड़ में स्थित 17 राष्ट्रीय राइफल के जवानों को यह सूचना मिली थी कि इलाके में हिजबुल मुजाहिदीन के आतंकवादियों ने कुछ हथियार छिपा रखे हैं। इसी के चलते राष्ट्रीय राइफल के जवानों ने पुलिस को साथ लेकर सर्च ऑपरेशन शुरू किया। गुफा के अंदर तलाशी लेने के बाद कुछ हथियार और गोला बारूद बरामद हुआ है, जिसमें एक एके 56 राइफल, उसकी 27 गोलिया, एक ग्रेनेड लांचर, एक 9 एमएम की पिस्तौल, उसकी एक मैगजीन, जिसमें छह गोलिया मौजूद थीं। इसके चलते सुरक्षाबलों ने एक बड़ी कामयाबी हासिल की है।

बताया जा रहा है कि यह गुप्त ठिकाना आतंकी अमीन भट उर्फ जहागीर सरूरी के साथियों का हो सकता है, क्योंकि जहागीर को तलाशने के लिए सुरक्षाबल काफी समय से तलाश में हैं और इलाके में उसने अपना नेटवर्क बना रखा है। उसकी कोई सूचना नहीं देता है वह स्थानीय युवकों को हथियार देने की फिराक में घूम रहा है और धीरे-धीरे करके स्थानीय युवकों को हिजबुल मुजाहिदीन में शामिल करने के लिए दबाव भी बना रहा है। इसी के चलते उसने इलाके में हथियार सप्लाई करने का काम भी शुरू किया है, लेकिन सेना तथा पुलिस भी उसके इस मंसूबे को खत्म करने के लिए तरह-तरह के उपाय कर रही है, ताकि जहागीर सरूरी इलाके के युवकों को हथियार सप्लाई न कर सके।

आतंकी संगठन हिजबुल मुजाहिदीन, जैश-ए-मोहम्मद कश्मीर को दहलाने की साजिश में जुटे है। उसके अलावा दक्षिण कश्मीर में जैश के दो अन्य कमांडर वलीद और इस्माइल उर्फ लंबू भी सक्रिय हैं। घाटी में जैश के लगभग 55 आतंकी सक्रिय हैं। इनमें 40 विदेशी हैं। दरअसल, पुलवामा हमला दोहराने की साजिश में जैश कमांडर अब्दुल रहमान उर्फ फौजी के साथ इस्माइल और गाजी रशीद शामिल थे। फौजी को बुधवार को सुरक्षाबलों ने कंगन (पुलवामा) में मुठभेड़ में उसके दो अन्य आतंकियों के साथ मार गिराया है।

करीब तीन साल से कश्मीर में सक्रिय गाजी पर सुरक्षाबलों ने 10 लाख का इनाम घोषित कर रखा है। वह भी अफगानिस्तान में तालिबान और अलकायदा के आतंकियों के साथ मिलकर अमेरिकी फौजों के खिलाफ लड़ चुका है। वर्ष 2017 की गर्मी में पहली बार सुरक्षाबलों को कश्मीर में उसकी मौजूदगी का पता चला था। शुरू में वह बड़गाम और पुलवामा जिले के बीच के इलाकों में सक्रिय रहा। वर्ष 2019 में पुलवामा में जैश के आत्मघाती हमले के बाद सुरक्षाबलों से बचने के लिए वह कुछ समय तक उत्तरी कश्मीर में अपने किसी ठिकाने पर चला गया और बीते साल वह फिर दक्षिण कश्मीर लौट आया।

आइजीपी कश्मीर विजय कुमार ने बुधवार को प्रेसवार्ता में बताया कि पाकिस्तान का रहने वाला अब्दुल्ला रशीद गाजी उर्फ गाजी रशीद कश्मीर में जैश का सबसे बड़ा कमांडर है। वही घाटी में जैश की गतिविधियां चला रहा है।

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