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यहां अफसरों ने ठानी नहीं सुधरने की जिद, फिर अदालत ने लगाया 41 लाख जुर्माना

रांची। Jharkhand High Court Imposed 41 Lakh Rupees Fine झारखंड हाई कोर्ट ने एक बार फिर सरकार पर 41 लाख का जुर्माना लगाकर सिस्टम में लगे जंग की ओर इंगित किया है कि कोर्ट के आदेश पर भी कार्रवाई नहीं की जाती है। ऐसे फैसले पहले भी सुनाए गए हैं लेकिन अधिकारियों पर असर नहीं हुआ। यह स्थिति अच्छी नहीं मानी जा सकती। लोगों को जंग लगे तंत्र में रहने की आदत भी हो गई है। राजनीतिक इच्छाशक्ति ही इस जंग की सफाई में कारगर साबित हो सकती है।

हाईकोर्ट ने अपने फैसले में स्पष्ट कहा है कि 41 लाख रुपये के जुर्माने की रकम दोषी अधिकारियों से वसूली जाए। सरकार एक बार दोषी अधिकारियों से जुर्माना वसूल ले तो निश्चित तौर पर आनेवाले दिनों में दूसरे अधिकारी इस तरह की गलतियों से बचने की कोशिश करेंगे अन्यथा यह परिपाटी चलती ही रहेगी। कार्यपालिका को भी हर फैसले के लिए न्यायपालिका की ओर ताकने की आदत छोडऩी होगी।

हाईकोर्ट ने शिक्षकों की प्रोन्नति के मामले में आदेश के बावजूद कार्रवाई नहीं किए जाने पर सभी 41 शिक्षकों को एक-एक लाख रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया है। इस प्रकार सरकार को 41 लाख रुपये का हर्जाना भरना होगा। प्रोन्नति से वंचित शिक्षक 2011 से अपने हक की लड़ाई लड़ रहे हैं और इस दौरान निश्चित तौर पर अच्छी खासी रकम भी गंवाई है। बात हक और न्याय की है और इसलिए लड़ाई से कोई इनकार भी नहीं कर सकता।

कोर्ट ने भी इनके हक में फैसला देकर तंत्र को दुरुस्त करने की कोशिश की थी लेकिन नहीं सुधरने की जिद में अधिकारियों ने हाईकोर्ट की बात भी नहीं मानी। अगली तिथि पर साहिबगंज के डीएसई को सशरीर उपस्थित होने को भी कहा गया है। रवैया नहीं बदला तो वह दिन दूर नहीं जब इस मामले में शिक्षा विभाग के अन्य अधिकारी भी कार्रवाई के दायरे में आएंगे।

शिक्षा विभाग को भी ऐसे मामलों में मंथन करना चाहिए और कोशिश हो कि जल्द से जल्द कोई ऐसी व्यवस्था बने, जिससे आगे इस तरह के मामले देखने को नहीं मिलें। पूरे सिस्टम और विभाग को ऐसे फैसलों से सीख लेने की आवश्यकता है, ताकि आनेवाले दिनों में इस तरह की गड़बडिय़ां कम हों।