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IPS अनुराग गुप्‍ता पर नया खुलासा, ट्रांसफर के बाद भी 2 साल तक बने रहे आइजी विजिलेंस

रांची। राज्यसभा चुनाव में पार्टी विशेष के लिए काम करने के आरोप में घिरे 1990 बैच के आइपीएस अधिकारी अनुराग गुप्ता के खिलाफ एक और मामला सामने आया है। फिलहाल वे सस्पेंड हैैं। उनके उपर एक और सनसनीखेज आरोप लगा है कि उन्होंने स्थानांतरण के बावजूद तत्कालीन झारखंड राज्य विद्युत बोर्ड (जेएसईबी) में करीब दो साल तक आइजी निगरानी के पद पर रहते हुए कई महत्वपूर्ण काम निपटाए।

आरोप है कि इस दरम्यान उन्होंने बिजली बोर्ड में निजी कंपनियों के टेंडर में अपने पद का दुरुपयोग किया। सरकार तक इस संबंध में सूचना पहुंची है। सूचना मिलने के बाद राज्य सरकार ने झारखंड राज्य ऊर्जा विकास निगम को पूरे मामले में जांच कर रिपोर्ट सौंपने का आदेश दिया है। इस पूरे प्रकरण पर आइपीएस अधिकारी अनुराग गुप्ता से उनका पक्ष जानने की कोशिश की गई, लेकिन उन्होंने जवाब नहीं दिया।

मिली जानकारी के अनुसार आइपीएस अधिकारी अनुराग गुप्ता को जेएसईबी में 21 जुलाई 2011 को आइजी विजिलेंस के पद पर पदस्थापित किया गया था। 20 जुलाई 2013 को उनका स्थानांतरण आइजी प्रोविजन के पद पर किया गया था। इसी बीच, एक कथित पत्र ने यह सनसनी फैला दी है कि स्थानांतरण के बावजूद 20 फरवरी 2015 को अनुराग गुप्ता ने जेएसईबी में आइजी विजिलेंस के हैसियत से पत्र जारी किया था। अब झारखंड राज्य ऊर्जा निगम की जांच रिपोर्ट के बाद ही पूरी स्थिति स्पष्ट होगी।

बेड़ो डीएसपी ने कैसे किया जगन्नाथपुर थाने में दर्ज केस का सुपरविजन, ली जा रही रिपोर्ट

राज्यसभा चुनाव के दौरान पार्टी विशेष के लिए काम करने के आरोपित आइपीएस अधिकारी अनुराग गुप्ता के खिलाफ रांची के जगन्नाथपुर थाने में दर्ज मामले में प्रशासनिक घेरा कसता जा रहा है। जांच में आरोपितों को बचाने में जो-जो अधिकारी शामिल रहे हैं, उनका फंसना तय माना जा रहा है।

अब एक नई सूचना आई है कि जगन्नाथपुर थाने में दर्ज उक्त कांड के सुपरविजन की जिम्मेदारी बेड़ो के डीएसपी को दी गई थी, जबकि जगन्नाथपुर थाना हटिया के डीएसपी (वर्तमान में एएसपी हटिया) के अधीन आता है। सूचना है कि इस कांड का सुपरविजन करने वाले बेड़ो के डीएसपी पर भी कार्रवाई की गाज गिरेगी। सरकार के आदेश पर पूरे प्रकरण की गंभीरता से जांच चल रही है और उठाए गए सभी बिंदुओं की तह खंगाली जा रही है।