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अचानक हुई मेला समाप्ति की घोषणा, अधर में फंसे व्यापारी व खरीदार

ग्वालियर। कोरोना के तेजी से होते विस्तार को देखते हुए ग्वालियर व्यापार मेला 28 मार्च तक समेटने के आदेश कलेक्टर द्वारा जारी कर दिए गए हैं। आदेश में स्पष्ट उल्लेख है कि 28 फरवरी तक व्यापारी अपनी दुकानें खाली कर मेला प्राधिकरण को सुपुर्द कर दें। ऐसे में व्यापारियों के सामने बड़ा संकट खड़ा हो गया है। कई व्यापारियों ने लाखों रुपये कर्जा लेकर दुकानें लगाई हैं। उन्हें उम्मीद थी कि मेले में व्यापार करके वह अच्छा मुनाफा कमाकर कर्जा पटा देंगे। मगर अचानक हुई मेला समाप्ती की घोषणा के कारण व्यापारी मानो बीच मजधार में फंस गए हैं। व्यापारियों को कोरोना की भी चिंता है, मगर उनकी चिंता पर आर्थिक नुकसान का क्रोध व आक्रोश पूरी तरह से हावी है।

वहीं मेले से खरीदारी की आस में बैठे सैलानियों को भी बड़ा धक्का लगा है। खासकर जिन्हें मेले से वाहन खरीदना है, वे खासा परेशान हैं। क्योंकि एक ओर जहां वाहनों की कमी होने के कारण लोगों को जल्दी डिलेवरी नहीं मिल पा रही है। वहीं केवल 4 दिन बाकी रहने के कारण आटोमोबाइल सेक्टर में भीड़ बढ़ गई है। कई डीलरों ने 15 अप्रैल तक की मेला अवधि को ध्यान में रखकर अधिक कारें मंगा ली हैं। अब वे व्यापारी इस लिए चिंतित हैं कि कहीं 28 मार्च तक कार न बिक सकीं तो उनपर आर्थिक भार बढ़ेगा।

घर नहीं आई कार, अगले महीने शुरू हो जाएगी किश्त

एक आटोमोबाइल ने अचानक मेला समाप्ती की व्यावहारिक परेशानी को उदाहरण देकर समझाया। उन्होंने बताया कि एक सेना के अधिकारी ने 20 दिन पहले कार के लिए फायनेंस कराया है, अब प्रक्रिया पूरी हुई है। गाड़ी अभी तक सेना अधिकारी के घर नहीं पहुंची है, जबकि 5 मार्च से उनके लोन की किश्त शुरू हो जाएगी। सेना के अधिकारी ने केवल आरटीओ छूट के मोह में कार फायनेंस कराई है।

-आरटीओ छूट का लाभ लेने के लिए बड़ी संख्या में लोगों ने बैंक से लोन लेकर गाड़ियां बुक करा ली हैं। कारोबारी उनकी गाड़ियों की डिलेवरी नहीं दे पा रहे, क्योंकि वाहनों की कमी है। 28 मार्च के बाद उन्हें छूट का लाभ नहीं मिलेगा, जिसके लिए उन्होंने कर्जा लिया है। कारोबारियों ने पूर्ण निर्धारित मेला अवधि के हिसाब से अतिरिक्त फंड खर्च कर कंपनियों से गाड़ियां मंगा लीं, अब वे बिक नहीं पाएंगी तो बोझ बढ़ेगा। आटोमोबाइल सेक्टर कोरोना नियमों का पालन किया जा सकता है, अभी भी फैसले पर पुनर्विचार किया जा सकता है।

मुकेश अग्रवाल, चेयरमेन, समर्थ सोम्या ग्रुप

-निर्धारित अवधि से पूर्व मेला समाप्त किया जा रहा है, ऐसे में प्राधिकरण व्यापारियों का आर्थिक हित भी देखे। यथासंभव मुआवजा दें। दुकानों का किराया व बिजली बिल अगले साल समायोजित करना सुनिश्चित करे।

बलवीर खटीक, अध्यक्ष, मेला दुकानदार कल्याण समिति

-कर्जा लेकर कई व्यापारियों ने दुकानें लगाई हैं, इस तरह अचानक मेला खत्म कर देने से गरीब व्यापारियों की मुसीबत हो जाएगी। हमने इन पहलुओं से संभागायुक्त को भी अवगत कराया है। मेला समाप्त करने के बजाय कोई और रास्ता भी प्रशासन निकाल सकता है। कोविड नियमों का सख्ती से पालन कराएं। मेला समाप्त कर ही रहे हैं तो दुकानों का किराया व बिजली बिल अगले साल के मेले में समायोजित करें

महेंद्र भदकारिया, अध्यक्ष, ग्वालियर व्यापार मेला व्यापारी संघ