Logo
ब्रेकिंग
बीएफसीएल द्वारा महेश्वर धाम में दो दिवसीय निःशुल्क नेत्र जांच शिविर का आयोजन, 163 लाभार्थियों की हुई... झारखंड को मिली बड़ी सौगात,17 जनवरी को खुलेगा सब-डीओ कार्यालय, आर्मी लैंड केस अब लोकल लेवल पर! गुरुजी के घर पहुंचे अखिलेश यादव, भावुक होकर कहा – आदिवासियों की आवाज़ हमेशा गूंजेगी मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन राजनीति की चकाचौंध से दूर पैतृक गांव नेमरा की मिट्टी में रचे-बसे नज़र आ रहे ... रामगढ़ की बेटी चंद्र ज्योति उपाध्याय ने रचा इतिहास, JPSC में पाई 70वीं रैंक, बनीं डिप्टी कलेक्टर युवा आजसू का संकल्प – हर गांव, हर विद्यालय में हरा अभियान! आफ़ताब अंसारी के मामले कि जांच और परिजनों को मिले मुआवजा : जोया प्रवीण रामगढ़ थाना से फरार आफताब कि मौ*त, जमकर बवाल, इंस्पेक्टर प्रमोद सिंह और कई पुलिसकर्मी निलंबित रामगढ़ डीसी बने फरिश्ता, बेहोश स्कूली बच्चे को अपनी गाड़ी से पहुंचाया अस्पताल, बचाई जान प्रधान सचिव पेयजल एवं स्वच्छता विभाग झारखंड सरकार श्री मस्त राम मीणा ने किया रामगढ़ जिले का दौरा।

केन-बेतवा प्रोजेक्ट से दतिया की 13 हजार हेक्टेयर भूमि होगी सिंचित

दतिया। केन-बेतवा प्रोजेक्ट में मध्य प्रदेश को पानी मिलने के मामले में फैसला होने से दतिया जिले की 13 हजार हेक्टेयर भूमि सिंचित हो सकेगी। बामोर प्रोजेक्ट जो अभी प्रस्तावित सिंचाई नहर परियोजना है, उसका काम भी अंतिम दौर में चल रहा है। इस परियोजना से कुल 1 लाख 10 हजार 400 हेक्टेयर भूमि को सिंचित करने का लक्ष्य रखा गया है। बामोर प्रोजेक्ट के परियोजना अधिकारी एके गुप्ता ने बताया कि केन-बेतवा का अधिकांश जल उत्तर प्रदेश को मिल जाता था। शेष बचे हुए जल से हम सिंचाई कर पाते थे और नदी पर बनाए जा रहे हैं, 2208 करोड़ के प्रोजेक्ट को इससे जीवनदान मिल गया है। इसके तहत 328 एमसीएम ( मिलियन क्यूबिक मीटर) पानी अब पूरी तरह से बामोर परियोजना को मिल पाएगा। उन्होंने बताया कि वर्तमान में शिवपुरी जिले के दीदावरी में और नदी पर डैम बना रखा है। इस डैम का पानी सिंचाई के लिए इस्तेमाल किया जाता है।

500 किमी नेटवर्क में होगा जल प्रदाय

बामोर परियोजना तहत 500 किलोमीटर की पाइप लाइन का नेटवर्क अंडर ग्राउंड बिछाया जा रहा है। कुल 10 हजार किलोमीटर का यह सिंचाई नेटवर्क है। जिसने स्प्रिंकलर के माध्यम से खेतों में सिंचाई होगी और जल का पूरा-पूरा उपयोग हो पाएगा। इससे दतिया जिले की अतिरिक्त 13 हजार हेक्टेयर भूमि को जल उपलब्ध हो पाएगा और इससे कृषि उत्पादन भी जिले में बढ़ जाएगा।