इंदौर। पाल समाज ने सूबेदार मल्हारराव होलकर की 328वी जयंती हर्षोल्लास से मनाई। इस मौके पर लालबाग स्थित प्रतिमा पर माल्यर्पण किया गया। उनके द्वारा किए गए प्रेरक कार्य को समाजजनों ने याद किया। बड़ी संख्या में समाजजन जुटे। विभिन्न सेवाभावी संगठनों द्वारा भी माल्यर्पण किया गया।
पाल समाज के अध्यक्ष मन्नूराम पाल ने कहा कि मल्हारराव होलकर का जन्म साधारण गडरिया (धनगर) परिवार में हुआ था, जब वे चार वर्ष के थे, तब उनके पिता की मृत्यु हो गई थी। उनका पालन पोषण माता और मामा की देखरेख में हुआ। वे बचपन से ही साहसी और निडर प्रवृति के थे, बचपन से ही उनमें नेतृत्व करने की क्षमता भी दिखलाई पड़ती है। सेना की टुकड़ियों को कदमताल करते देख उनकी भी इच्छा सेना में शामिल होने की होती थी। 16 वर्ष की आयु में वे मराठा सेना में शामिल हुए, कड़े परिश्रम से जल्द ही उनकी गिनती बहादुर सैनिकों में होने लगी।
पाल नवयुवक मंडल के अध्यक्ष वरुण पाल ने कहा कि पेशवा और निजाम के बीच युद्ध हुआ जिसमें उनकी बहादुरी और रण चातुर्य के कारण निाम को हार का मुंह देखना पड़ा, उनकी बहादुरी के किस्से पेशवा सरकार तक पहुंचे। पेशवा सरकार ने उन्हें पुणे बुलवा लिया। उनकी योग्यता और स्वामी भक्ति देख कर पेशवा सरकार ने उन्हें फ़ौज का सूबेदार बनाकर मालवा और खानदेश का अधिकारी नियुक्त कर दिया। उन्होंने अटक से कटक तक हिंदुत्व का ध्वज बुलंद कर होलकर सम्राज्य स्थापित किया। इस अवसर पर आदर्श पाल, दिलीप पाल, अजय पाल, शिव पाल, विपिन पाल, पिंकू पाल, साहिल पाल आदि सामाजिक कार्यकर्ता उपस्थित थे।
