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अंग्रेज जल्दी भारत छोड़कर चले गए उसके पीछे नेताजी का योगदान अभूतपूर्व

जबलपुर। आजाद हिंद फौज की गतिविधियों से इस कदम भय पैदा हुआ कि अंग्रेज जल्दी भारत छोड़कर चले गए। इसके पीछे नेताजी सुभाषचंद्र बोस का योगदान अभूतपूर्व था। इस आशय के उद्गार केरल के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान ने व्यक्त किए। वे शुक्रवार को शहीद स्मारक, सभा भवन, गोलबाजार, जबलपुर में ‘नेताजी सुभाषचंद्र बोस राष्ट्रवाद और युवा सरोकार विषयक एक दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी के उद्धाटन सत्र में मुख्य अतिथि की आसंदी से संबोधित कर रहे थे। इस दौरान केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) प्रहलाद सिंह पटेल, कोलकाता से आए नेताजी के भतीजे चंद्रकुमार बोस, मेजर जनरल जीडी बख्शी व इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र के सदस्य सचिव सच्चिदानंद जोशी मंचासीन रहे।

युवाओं को अपने इतिहास व परंपराओं की जानकारी होनी चाहिए : नेताजी सुभाष चंद्र बोस की 125 वीं जयंती के उपलक्ष्य में इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र, संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार के तत्वावधान में आयोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी का उद्धाटन करते हुए राज्यपाल श्री खान ने कहा कि हमारे युवाओं को अपने इतिहास व परंपराओं की जानकारी आवश्यक रूप से होनी चाहिए। ऐसा होने पर कई समस्याएं खुद-ब-खुद दूर हो जाएंगी। दरअसल, भारतीय संस्कृति में न केवल भारत बल्कि दुनिया भर की समस्याएं दूर करने के तत्व मौजूद हैं।

जिस शहर से नेताजी की यादें जुड़ीं वहां आना गौरव की बात : उन्होंने कहा कि जिस शहर से नेताजी की यादें जुड़ी हुई हैं, वहां आना मेरे लिए बेहद गौरव की बात है। जबलपुर शहर वाकई अनूठा है, जिसने नेताजी को सम्मान देकर इतिहास के पृष्ठों पर अमिट छाप छोड़ी है।

नेताजी रामकृष्ण परमहंस व स्वामी विवेकानंद से रहे प्रभावित : राज्यपाल श्री खान ने कहा कि रामकृष्ण परमहंस व स्वामी विवेकानंद का नेताजी पर विशेष प्रभाव रहा। एक तरह से नेताजी को विवेकानंद का मानस-पुत्र कहा जाए तो कोई अतिश्योक्ति नहीं होगी।

इसी शहर में नेताजी के सम्मान में निकला था 52 हाथियों का जुलूस : राष्ट्रीय संगोष्ठी के उद्धाटन सत्र की अध्यक्षता कर रहे केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) प्रहलाद सिंह पटेल ने अध्यक्षीय उद्बोधन में कहा कि 1939 में कांग्रेस के 52 वें अधिवेशन में नेताजी सुभाषचंद्र बोस राष्ट्रीय अध्यक्ष पद के प्रत्याशी थे, इसीलिए उनके सम्मान में जबलपुर की सड़कों पर 52 हाथियों का जुलूस निकाला गया। नेताजी जबलपुर के पास सिवनी और फिर जबलपुर की सेंट्रल जेल में राजनीतिक बंदी रहे। इन्हीं यादों को ध्यान में रखते हुए यह कार्यक्रम आयोजित किया गया है।

125 वीं जयंती पर साल भर कार्यक्रमों की श्रंखला : इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र के सदस्य सचिव सच्चिदानंद जोशी ने बताया कि नेताजी सुभाषचंद्र बोस की 125 वीं जयंती वर्ष को यादगार बनाने के लिए साल भर कार्यक्रमों की श्रंखला निर्धारित की गई है। इसी कड़ी में जबलपुर और नेताजी के जुड़ाव को महत्वपूर्ण मानते हुए यहां कार्यक्रम निर्धारित किया गया। राष्ट्रीय संगोष्ठी के उद्धाटन सत्र का संचालन वरिष्ठ पत्रकार रवींद्र बाजपेयी ने प्रभावी तरीके से किया। इस दौरान इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र के न्यासी आलोक जैन सहित अन्य का सहयोग रहा।