कांग्रेस के केंद्रीय मंत्री ने इंदिरा सरकार से की मोदी सरकार की तुलना, बोले- 1977 जैसा हश्र होगा नही

इंदौर: कांग्रेस के पूर्व केंद्रीय मंत्री असलम शेर खान इंदौर दौरे पर हैं। इंदौर में मीडिया से रुबरू होते हुए उन्होंने मोदी सरकार की तुलना इंदिरा गांधी की सरकार से की और कहा कि मोदी सरकार पूर्ण बहुमत से आगे बढ़ी है लेकिन जो हश्र 1977 में इंदिरा गांधी का हुआ था, वही हश्र पूर्ण बहुमत के साथ आने वाली मोदी सरकार का भी हो सकता है, क्योंकि मोदी सरकार अब हिटलर शाही की तरफ आगे बढ़ चुकी है।

पूर्व केंद्रीय मंत्री असलम शेर खान ने किसान आंदोलन का समर्थन करते हुए कहा कि जिस तरह से किसान आंदोलन चल रहा है और इस मसले को लेकर सरकार का जो व्यवहार नजर आ रहा है, वह शर्मनाक है। देश के किसानों को देश की राजधानी दिल्ली आने से भी रोका जा रहा है, उनकी राह में कीले बिछाई जा रही है, चीन की दीवार जैसी दीवारें खड़ी की जा रही है, पुलिस फोर्स लगाकर किसानों को बॉर्डर पर रोका जा रहा है। सरकार को याद रखना चाहिए कि भारत एक गणतंत्र राज्य है, यहां जनता अपने गुस्से का जवाब चुनावों में देती है। अपने फैसलों की वजह से इंदिरा सरकार की तरह मोदी सरकार को भी मुंह की खानी पड़ सकती है। वही उन्होंने कहा कि पंजाब के मुख्यमंत्री की चिंता सही है। सिखों के साथ जाट कम्युनिटी और अब पूरे नॉर्थ इंडिया में किसान इस आंदोलन से जुड़ रहे हैं, यदि यहां अशांति होती है तो पूरे देश पर इसका प्रभाव नजर आ सकता है।

पूर्व केंद्रीय मंत्री असलम शेर खान ने मध्य प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ नेता कांतिलाल भूरिया के बयान को निंदनीय बताया है। उनका कहना है कि राम सब की आस्था का केंद्र है, किसी भी नेता को गलत बयानबाजी से ना सिर्फ बचना चाहिए, बल्कि इतनी हल्की राजनीति भी नहीं करना चाहिए। हालांकि हाल ही में भोपाल में सामने आई एक घटना के बारे में भी उन्होंने बात करते हुए कहा कि आस्था के नाम पर गलत तरह से चंदा उगाना भी गलत है, लेकिन किसी भी नेता को इस तरह से बयान देना भी गलत है। बता दें कि कांतिलाल भूरिया ने जिस तेजी के साथ चंदे के पैसे से शराब पीने की बात कही थी उतनी ही तेजी से वे उसे बदलकर पहले के समय मे एकत्रित राशि का हिसाब मांगते दिखाई दिए लेकिन उनका वो बयान अब भी उन्हें विवादों में रखे हुए हैं।

वही पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ का जिक्र करते हुए पूर्व केंद्रीय मंत्री असलम शेर खान ने कहा कि भाजपा को अकेले राम मंदिर निर्माण का श्रेय नहीं लेना चाहिए, क्योंकि बाबरी मस्जिद का ताला खुलवा कर राम मंदिर बनाने की नींव कांग्रेस सरकार में ही रखी गई थी, इसलिए भाजपा द्वारा राम मंदिर निर्माण का श्रेय लेना भी गलत है।

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