Logo
ब्रेकिंग
हाथी का दांत को वन विभाग के अधिकारी ने किया जप्त। नवरात्रि के उपलक्ष में भव्य डांडिया रास का 24 सितंबर को होगा आयोजन । हजारीबाग में 30 फीट गहरी नदी में पलटी बस 07 लोगों की हुई मौत, गैस कटर से काटकर शव को निकाला गया। दो नाबालिग लड़की के दुष्कर्म मामले में फरार दोनो आरोपी को पुलिस ने किया गिरफ्तार। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता शांतनु मिश्रा राजीव गांधी पंचायती राज संगठन के प्रदेश उपाध्यक्ष मनोनीत मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन से राज्य के विभिन्न जिलों से पहुंचे नवनियुक्त जिला परिषद अध्यक्षों ने मुलाक... प्रखंड सह अंचल कार्यालय, रामगढ़ का उपायुक्त ने किया निरीक्षण पल्स पोलियो अभियान का रामगढ़ उपायुक्त ने किया शुभारंभ MRP से ज्यादा में शराब बेचने वालों की खैर नहीं, उपायुक्त ने दिया जांच अभियान चलाने का निर्देश । हेमंत कैबिनेट का बड़ा फैसला- 1932 के खतियानधारी ही झारखंडी,OBC को 27 प्रतिशत आरक्षण, जानें अन्य फैसल...

50 लाख रुपये मासिक अधिक के कारोबार वाली इकाइयों को एक प्रतिशत जीएसटी नकद भरना होगा

नई दिल्ली। वित्त मंत्रालय ने कहा है कि 50 लाख रुपये से अधिक के मासिक कारोबार वाली इकाइयों को अनिवार्य रूप से एक प्रतिशत माल एवं सेवा कर (जीएसटी) देनदारी का भुगतान नकद में करना होगा। यह कदम जाली बिल (इन्वॉयस) के जरिये कर चोरी रोकने के लिए उठाया गया है। केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर एवं सीमा शुल्क बोर्ड (सीबीआईसी) ने जीएसटी नियमों में नियम 86 बी पेश किया है।

यह नियम इनपुट कर क्रेडिट (आईटीसी) का अधिकतम 99 प्रतिशत तक ही इस्तेमाल जीएसटी देनदारी निपटाने की अनुमति देता है। सीबीआईसी ने बुधवार कहा, ‘‘किसी महीने में करयोग्य आपूर्ति का मूल्य 50 लाख रुपये से अधिक होने पर कोई भी पंजीकृत व्यक्ति इलेक्ट्रॉनिक क्रेडिट लेजर में उपलब्ध राशि का इस्तेमाल 99 प्रतिशत से अधिक कर देनदारी को पूरा करने के लिए नहीं कर सकता।’’

कारोबार की सीमा की गणना करते समय जीएसटी छूट वाले उत्पादों या शून्य दरों वाली आपूर्ति को इसमें शामिल नहीं किया जाएगा। हालांकि, कंपनी के प्रबंध निदेशक या किसी भागीदार ने यदि एक लाख रुपये से अधिक का आयकर दिया है अथवा रजिस्टर्ड व्यक्ति को इससे पिछले वित्त वर्ष के दौरान इस्तेमाल न हुए इनपुट कर क्रेडिट पर एक लाख रुपये से अधिक का रिफंड मिला है, तो यह अंकुश लागू नहीं होगा।

ईवाई के कर भागीदार अभिषेक जैन ने कहा कि सरकार ने 50 लाख रुपये मासिक से अधिक के करयोग्य कारोबार पर इनपुट कर क्रेडिट के जरिये कर देनदारी के भुगतान को 99 प्रतिशत तक सीमित किया है। जैन ने कहा, ‘‘इस कदम का मकसद कंपनियों को जाली बिलों के जरिये आईटीसी का दुरुपयोग करने से रोकना है।’’