कोविड के दौर में खड़ी हुई मुश्किलों को हरा प्रथम राष्ट्रीय कला उत्सव में बिखेरेंगे अपनी आवाज का जादू

इंदौर। अपनी गायकी के अंदाज से लोगों को मंत्रमुग्ध करने वाले इंदौर के सरकारी उत्कृष्ट बाल विनय मंदिर स्कूल में कक्षा 12 वीं में पढ़ने वाले छात्र प्रथम शर्मा और उनके परिवार के सामने कोविड ने कई चुनौती खड़ी की। इसके बाद भी उन्होंने हौंसला नहीं हारा और अपनी आवाज से एक अलग पहचान बनाई। प्रथम का चयन दिल्ली में होने वाले राष्ट्रीय कला उत्सव के लिए हुआ है। राष्ट्रीय कला उत्सव के तहत राज्य स्तरीय चयन प्रतियोगिता के शास्त्रीय गायन में इंदौर ही नहीं मध्य प्रदेश से चुने गए वे एकमात्र छात्र हैं। उन्होंने राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में अपना ऑनलाइन विडियो स्कूल के माध्यम से भेजा गया था। इसके आधार पर उनका चयन हुआ और अब वे दिल्ली में राष्ट्रीय कला उत्सव में लाइव परफार्मेंस देंगे। स्कूल की प्राचार्य संगीता विनायका के मुताबिक यह पहला मौका है जब इंदौर जिले का कोई सरकारी स्कूल का छात्र राष्ट्रीय कला उत्सव के लिए चुना गया

पिता व मां का काम बंद हुआ तो गुल्लक तोड़ निकाले तीन साल तक जोड़े रुपये

प्रथम और उनका परिवार इंदौर के यशवंत निवास रोड के किनारे घर में रहता है। उनके पिता शैलेन्द्र शर्मा ऑटो डील में काम करते है। कोविड व लाकडाउन के कारण उन्हें दो माह तक घर पर बैठना पड़ा। प्रथम की मम्मी लक्ष्मी शर्मा स्कूल में शिक्षिका थी स्कूल बंद होने से उन्हें भी घर पर रहना पड़ा। ऐसे में परिवार ने दो माह तक घर में जो जमा पूंजी थी उससे जैसे-तैसे गुजारा किया। परिस्थिति ऐसी आई कि प्रथम और उनकी बहन व मां ने गुल्लक में जो चार साल तक 15 हजार रूपये जोड़े थे उसे तोड़कर निकालाना पड़ा।

आर्मी बेंड में गायक मामा से मिली प्रेरणा

प्रथम बताते है कि उनके मामा आर्मी बेंड में गायक हैं। उनसे ही उन्हें गाने की प्रेरणा मिली और अब वे क्लासिकल सिंगर बनना चाहते हैं। 19 दिसंबर को राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में प्रथम ने राग मालकौंस को रिकॉर्ड कर भेजा था। इसके आधार पर उनका चयन हुआ। वे छह साल की उम्र से गायन की शिक्षा ले रहे हैं और हारमोनियम बजाते हैं। शास्त्रीय संगीत में प्रथम ने विशारद किया है। संगीत शिक्षा में उनकी शिक्षा आभा व विभा चौरसिया ने काफी सहयोग दिया और प्रोत्साहित कर उसे आगे बढ़ाया। चार साल पहले इंडियन आईडियल जूनियर में उनका चयन दिल्ली तक हुआ था। पिछले वर्ष संभाग स्तरीय बालरंग में भी उनका गायन में स्कूल की ओर से चयन हुआ था

पुरस्कार की राशि से खरीदूंगा हारमोनियम

लॉकडाउन में जब स्कूल बंद थे तौ मैं सुबह-शाम संगीत का रियाज करता था। मैं शास्त्रीय गायन में आगे बढ़ना चाहता हूं। हारमोनियन खरीदना मेरे लिए संभव नहीं है। संगीत शिक्षक ने प्रेक्टिस के लिए अपना हारमोनियम दिया। यदि इस पुरस्कार में जीता तो हारमोनियम जरूर खरीदूंगा।– प्रथम शर्मा, छात्र

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