रामगढ़ की धरती से जुड़ी है राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की यादें : उपायुक्त

बापू गांधी एवं शास्त्री जी के जयंती पर प्रशासनिक पदाधिकारियों ने किया श्रद्धा सुमन व्यक्त 1940 में कांग्रेस के अधिवेशन में महात्मा गांधी का रामगढ़ की धरती पर हुआ था आगमन पूरे देश में स्थापित 16 जगहों में एक मुक्तिधाम में भी गांधी जी के अस्थि कलश को स्थापित किया गया है

रामगढ़ : “रामगढ़ से जुड़ी है राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की यादें” यह बातें आज रामगढ़ उपायुक्त संदीप सिंह ने जिले के मुक्तिधाम में कहीं, मौका था बापू के 151 वीं जयंती का जहां जिले के तमाम प्रशासनिक पदाधिकारियों ने बापू एवं शास्त्री जी को उनके जयंती पर याद करते हुए अपने श्रद्धा सुमन पुष्पांजलि के रूप में अर्पित किए।

वीओ – रामगढ़ जिले के दामोदर नद पर स्थित मुक्तिधाम में आज राष्ट्रपिता महात्मा गांधी एवम पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की जयंती मनाई गई। बापू के इस 151 वी जयंती के मौके पर जिले के उपायुक्त सहित तमाम प्रशासनिक पदाधिकारियों ने साथ मे लाल बहादुर शास्त्री को उनकी जयंती पर पुष्पांजलि अर्पित किया।

 

पुष्पांजलि के बाद उपस्थित सभी लोगों ने कोविड-19 का ख्याल रखते हुए सोशल डिस्टेंस का पालन कर बापू एवम शास्त्री जी के तस्वीरों की परिक्रमा की एवम उनके बताए रास्ते पर चलने का संकल्प लिया। पत्रकारों से बात करते हुए उपायुक्त संदीप सिंह ने कहा कि महात्मा गांधी की यादें रामगढ़ की धरती से जुड़ी हुई है, मुक्तिधाम में गांधी जी के अस्थि कलश को भी स्थापित किया गया है इसलिए इस स्थान का महत्व बढ़ जाता है जहां जिले के सभी पदाधिकारियों ने दोनों की जयंती पर पुष्पांजलि दिया । 
महात्मा गांधी एवं लाल बहादुर शास्त्री के जयंती पर मुक्तिधाम संस्था के संस्थापक ने बताया कि रामगढ़ में 1940 में कांग्रेस के अधिवेशन में महात्मा गांधी के साथ उस वक्त के तमाम बड़े नेताओं ने यहां शिरकत करते हुए अपनी उपस्थिति दर्ज कराई थी और सुभाष चंद्र बोस ने “तुम मुझे खून दो मैं तुम्हें आजादी दूंगा” के नारे को यहीं से बुलंद किया था साथ ही इस जगह पर गांधीजी की अस्थि कलश स्थापित है इसलिए इस स्थान का महत्व बढ़ जाता हैं.
गौरतलब है कि 1940 में रामगढ़ की धरती पर कांग्रेस का महा अधिवेशन हुआ था जिसमें राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के साथ सुभाष चंद्र बोस, आचार्य कृपलानी एवं अन्य बड़े नेताओं ने शिरकत किया था।

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