25 गांव के ग्रामीणों का पीवीयूएनएल और पुलिस के खिलाफ अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू

ग्रामीण नौकरी, पुर्नवास और मुआवजा की कर रहे है मांग

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रामगढ़: झारखंड के रामगढ़ जिले में इस कोरोनकाल से हैरान करने वाली तस्वीर आई है जहा 25 गांव के महिला व पुरुष ग्रामीण पीवीयूएनएल और पुलिस के खिलाफ अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू कर दिए हैं ।

ये ग्रामीण नौकरी पुर्नवास और मुआवजा की मांग को लेकर पीवीयूएनएल के खिलाफ आज से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर है । ये लोग भूख हड़ताल अपने अपने गांवों व घरों में कर रहे है। इस भूख हड़ताल में गांव – गांव में ग्रामीण इकट्ठा होकर पीवीयूएनएल और पुलिस के खिलाफ जमकर नारेबाजी भी कर रहे है।

गौरतलब है कि पीवीयूएनएल के खिलाफ अपनी मांगों को लेकर ये विस्थापित प्रभावित ग्रामीण बीते 02 सितंबर से अनिश्चितकालीन धरना दे रहे थे, 3 सितम्बर की रात को धरना खत्म करवाने के लिये पुलिस ने ग्रामीणों की धरना को बल पूर्वक लाठीचार्ज करते हुए हटाया था। इस मामले में पुलिस ने कोरोनकाल में अत्यधिक भीड़ इकट्ठा  करने और सोशल डिस्टेंस मेंटेन ना करने साथ ही  सरकारी काम में बाधा डालने को लेकर 6 ग्रामीणों को नामजद करते हुए 200 अज्ञात ग्रामीणों पर पतरातू थाना में  मामला दर्ज किया है।

ग्रामीण दोषी पुलिसवालों पर कार्यवाही की कर रहे है मांग

वही दूसरी ओर ये ग्रामीण पुलिस की लाठीचार्ज मामले में दोषी पुलिसवालों पर कार्यवाही की मांग कर रहे है, इसके लिए इनके द्वारा निरंतर रूप से अपना विरोध व्यक्त किया जा रहा है कभी पुतला जलाकर तो कभी मशाल जुलूस निकालकर तो कभी उपवास रखकर यह लोग लगातार अपनी मांग को लेकर अपना विरोध प्रदर्शन जारी रखे हुए विरोध कर रहे लोगों ने ग्रामीण पर हुए केस को हटाने की भी मांग कर रहे है। इस मामले को लेकर ये ग्रामीण उस दिन से लगातार अपने अपने गांव में धरना प्रदर्शन करते आ रहे है। प्रदर्शन से कोई हल न निकलता देख ग्रामीणों ने आज से अनिश्चितकालीन  भूख हड़ताल शुरू कर दिया है ।

ग्रामीणों के अनुसार आज तक बहुत से ग्रामीण को मुआवजा नौकरी पुर्नवास नहीं मिली है। इनका कहना है कि जब तक पीवीयूएनएल प्रबंधक हमारी मांगे पूरी नही करती है और ग्रामीणों पर लाठीचार्ज मामले में दोषी पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई नहीं होती है, तब तक हमलोगो का आंदोलन जारी रहेगा।

वहीं इस मामले में पतरातू एसडीपीओ प्रकाश चन्द्र महतो ने बताया कि कोविड-19 में सरकार की जो गाइडलाइन है, धरना प्रदर्शन भीड़ इकट्ठा नहीं करना है, हम लोग ने ग्रामीणों से वार्ता कर बहुत समझाने का प्रयास भी किया लेकिन ये मानने को तैयार नहीं है

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