प्रधानमंत्री के वोकल टू लोकल को अमेरिका से लौटा युवक रामगढ़ में कर रहा है चरितार्थ

कंप्यूटर पर दौड़ने वाली उंगलियां आज खेतों में दौड़ रही है

रामगढ़: अमेरिका की नौकरी छोड़ राजीव ने अपने देश के झारखंड रामगढ़ में शुरू की ऑर्गेनिक खेती, इनके इस प्रयास को कृषि वैज्ञानिक ने भी सराहा और कहा कि बंजर भूमि पर लॉकडाउन में खेती कर ये दूसरे के लिए बने हैं प्रेरणा स्रोत जिस प्रकार मां का दूध बच्चों के लिए जरूरी है उसी तरह और आर्गेनिक उत्पाद भी अब लोगों की जरूरत बन गए हैं।

झारखंड प्रदेश के रामगढ़ जिले के बंजारी गांव में रहने वाले श्री राजीव रंजन पोद्दार दिल्ली में शॉफ्ट वेयर इंजीनियर की नौकरी करते थे। दिल्ली से अमेरिका गए फिर इसी दौरान उनके मन में अपने देश में खेती करने का जज्बा ऐसा छाया कि वे अपनी अमेरिका की अच्छी नौकरी को छोड़ अपने देश लौटने को मजबूर हो गए। अब राजीव ने अपने गांव बंजारी में 6 एकड़ की लीज के जमीन मे कृषि विज्ञान केंद्र, रामगढ़ के वैज्ञानिकों द्वारा दिये गए तकनीकी सहयोग से ऑर्गेनिक खेती के साथ- साथ समेकित कृषि प्रणाली के रूप में सब्जी उत्पादन कर रहे हैं तथा इनकी आगे की योजना फल, मछली पालन, डेरी, मशरूम उत्पादन करना भी है। इस मुद्दे पर इनके द्वारा की गई खेती का निरीक्षण कर रहे जिले के कृषि वैज्ञानिक दुष्यंत कुमार राघव ने बताया कि इनकी खेती में सबसे अच्छी बात यह है कि बाजार के जितने भी संसाधन हैं उनका उपयोग कम होगा तथा उनका आयात भी कम होगा और इस पर निर्भरता भी कम होगी और साथ ही साथ ऑर्गेनिक उत्पाद जो विदेशों से बड़े-बड़े फाइव स्टार होटल में आयात होते हैं उनके जगह पर लोकल ऑर्गेनिक सब्जी मिलेगा तब लोकल टू भोकल का नारा भी चरितार्थ होगा और आत्मनिर्भर बनने की श्रेणी में भी अच्छा कदम होगा, युवा इसे इंटर प्रेयोर के रूप में लेते हुए खुद भी आगे बढ़े और स्थानीय लोगों को भी रोजगार से जोड़े साथ ही एक विशेष उत्पाद की पहचान भी करें ।

जैविक खेती से हमारा प्रतिरोधक क्षमता अच्छा रहेगा: कृषि वैज्ञानिक

कृषि वैज्ञानिक ने यह भी बताया कि जैविक खेती के फायदे यह हैं कि रासायनिक कीटनाशक हमारे मिट्टी में नहीं आते हैं जिससे मिट्टी की उर्वरा शक्ति बरकरार रहती है और भोजन के द्वारा इसके दुष्प्रभाव भी कम होते हैं और भोजन जितना स्वस्थ होगा उतना हमारा प्रतिरोधक क्षमता अच्छा रहेगा फसल अवशेष को भी किसान खाद के रूप में उपयोग कर सकता है अगर कृषि वैज्ञानिक के देखरेख में किया जाए तो जिस तरह से मां का दूध नवजात के लिए पोषक प्रदान करता है उस तरह से जैविक उत्पाद भी पोषक प्रदान करेगा

बंजर पड़ी 6 एकड़ की जमीन को लीज पर लेकर कृषि योग्य बनाया

जहां वैश्विक महामारी कोरोना से बचाव को लेकर पूरे देश में लॉकडाउन लगा था वही श्री राजीव पोद्दार अपने किए गए निश्चय को सफल करने में लगे रहे। बंजर पड़ी 6 एकड़ की जमीन को लीज पर लेकर कृषि योग्य बना कर किसानों के लिए प्रेरणा का स्रोत बन चुके है। 3 महीनों की कड़ी मेहनत में उन्होंने समेकित कृषि के रूप में सब्जी की खेती की है जिसमें भिंडी, लौकी, मक्का, करेला, झिंगी, नेनुआ इत्यादि लगाकर वे अच्छा उत्पादन प्राप्त कर रहे हैं। इसके साथ खेत मे उपजाई गयी सब्जियों को नजदीकी बाजार में बेचकर लाभ भी प्राप्त कर रहे हैं। इस मुद्दे पर बात करते हुए उनकी पत्नी अंजलि ने बताया कि मेरे हस्बैंड पहले अमेरिका में नौकरी करते थे फिर हम दिल्ली आए और फिर अब रामगढ़ आ गए हैं वहां पर भी यह खेती के बारे में बोला करते थे यह सुनकर मेरा मन शॉक्ड हो गया लेकिन इनकी जिद पर हम लोग यहां आए और लॉकडाउन के समय से ही धीरे-धीरे इसमें लगे रहे, अब यहां फसल होने लगा 3 महीने में काफी मेहनत किया इन्होंने, इस जैविक खेती के सबसे बड़े फायदे यह हैं कि जनरल खाना से बच्चे ज्यादा बीमार पड़ते हैं तथा इसके सेवन से हमारा युमेंन सिस्टम मजबूत होता है।

राजीव रंजन के छोटे भाई मनीष ने बताया कि जब यह अमेरिका से हमें बताएं कि खेती का काम करेंगे यह सुनकर हम लोग शॉक्ड रह गए, लेकिन लॉकडाउन में भी उन्होंने काफी मेहनत किया रात भर यहां रुकते थे जिससे इस क्षेत्र का विकास हो रहा है सरकार से हम यह चाहते हैं कि हम इसे विश्व स्तर अवसर पर ले जाएं क्योंकि प्रधानमंत्री जी का भी सपना है कि हम आत्मनिर्भर बने इसके लिए सरकार का सहयोग भी हमें चाहिए।

मात्र 3 महीने के प्रयास से अब इस बंजर भूमि में अच्छी सब्जी पैदा होने लगी है

इस मुद्दे पर बात करते हुए रेलवे से सेवानिवृत्त हुए राजीव रंजन के पिताजी ने भी इन की काफी सराहना की और बताया कि मात्र 3 महीने के प्रयास से अब इस बंजर भूमि में अच्छी सब्जी पैदा होने लगी है वह भी जैविक जिसके कई फायदे
हैं ।

जैविक खेती आज दूसरे किसानों के लिए प्रेरणा बनी हुई है : मजदूर

लॉकडाउन के समय शुरू की गई यह जैविक खेती आज दूसरे किसानों के लिए प्रेरणा बनी हुई है हालांकि राजीव रंजन को उस दौरान काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ा था, अभी इनके पास तीन परमानेंट और 10 टेंपरेरी मजदूर लगातार काम कर रहे हैं, यह दूसरे लोगों को अब रोजगार देने में भी आगे की ओर अग्रसर हो रहे हैं। इस मुद्दे पर इनके खेत में काम करने वाले एक मजदूर ने बताया कि लॉक डाउन में रोजी नहीं मिल रहा था तो राजीव जी हम को रोजगार दिए इनके यहां हम लोग खेती करते हैं, इस खेती में हमलोग अपना बनाया हुआ ही खाद डालते हैं और इस सब्जी का स्वाद बहुत अच्छा लगता है ।

झारखंड सरकार के साथ मिलकर काम करने वाली एक सरकारी संस्था झारखंड स्टेट लाइवलीहुड प्रमोशन सोसाइटी के विनय कुमार ने राजीव पोद्दार के प्रक्षेत्र भ्रमण किया और राजीव पोद्दार द्वारा लिए गए निर्णय की सराहना की उन्होंने राजीव द्वारा किये जा रहे कार्यों के लिए उचित तकनीकी जानकारी देते हुए उन्हें प्रोत्साहित किया और प्रक्षेत्र में लगे औषधीय पौधे जैसे गिलोय, अजवाइन, पत्थरचट्टा, हड़जोड़ इत्यादि की तकनीकी जानकारी एवं महत्ता के बारे में समझाते हुए बताया कि मैं पूरे जिले में घूम कर जो किसान खेती को लेकर कुछ अच्छा करना चाहते हैं उनको तकनीकी मदद देते हैं और जैविक खेती के बारे में बताते हैं जिससे आय में वृद्धि होती है, राजीव जी अमेरिका में रहे हुए हैं और आईटी सेक्टर छोड़कर खुद की जमीन नहीं होने पर भी जमीन लीज पर लेकर 6 एकड़ में जो खेती कर रहे हैं यह बहुत अच्छी बात है कि दूसरे फील्ड के भी व्यक्ति इस फील्ड में आकर अच्छा कर सकते हैं, इसके कई फायदे हैं जो मिट्टी की उर्वरा शक्ति को बढ़ाते हैं और आय के साथ हमारे शरीर के युमेंन सिस्टम को भी मजबूत करता है और इनको देखकर और भी लोग आगे आए और खुद रोजगार सृजन कर दूसरे को भी इससे जुड़े।

रामगढ़ कृषि विज्ञान केंद्र के प्रभारी सह कृषि बैज्ञानिक डॉ दुष्यंत कुमार राघव ने जैविक कृषि की महत्वता एवं उपयोगिता, कीट एवं रोग प्रबंधन के लिए जैविक उपचार और कृषि के अन्य क्रियाकलापों के बारे में राजीव रंजन पोद्दार से चर्चा करते हुए उन्हें हमेशा केंद्र से जुड़े रहकर कृषि की नई तकनीक तथा कृषि से संबंधित समस्याओं के बारे में निदान के लिए हमेशा संपर्क बनाए रखने को कहा साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि वो कृषि विज्ञान केंद्र से तकनीक की जानकारी प्राप्त कर कृषि कार्यों को और वृहद रूप में ले जाए जिससे जिले के कुछ बेरोजगार युवाओं को रोजगार भी प्राप्त होगा और जिले के किसानों का जैविक खेती की ओर आकर्षण भी बढ़ेगा। इस मुद्दे पर बात करते हुए जैविक खेती करने वाले राजीव रंजन पोद्दार ने बताया कि मैं यही पला बढ़ा हूं यही रामगढ़ का निवासी हूं दिल्ली में मैं 20 वर्ष तक काम किया फिर अमेरिका गया, जिंदगी का मतलब अपने सोसायटी के लोगों के लिए कुछ करना होता है इसके लिए जमीन से जुड़ना जरूरी होता है, 2017 में मैंने मोदी जी की एक मीटिंग सुनी थी जिसमें उन्होंने कहा था कि बाहर से सामान कम मंगाए और आत्मनिर्भर बने तथा उत्पादन करें, मेरी भी सोच ऐसी थी कि कुछ करना है ।
राजीव ने यह भी बताया कि प्रधानमंत्री जी की सोच यही है कि किसान की आमदनी को दोगुना करना है इस दिशा में हम लोग कोशिश कर रहे हैं, एक साथ कई फसल निकाल रहे हैं जो वैल्यू एडिशन है ।
आगे राजीव रंजन यह बताते कि यह जैविक खेती हमने भारत भूषण त्यागी जी से सीखा है जिसमें वे इंटीग्रेटेड सिस्टम की बात करते हैं, जैसे गाय का गोबर मूत्र और फसल अवशेष खेत का इनपुट है, जीव और वन दोनों आपस में जुड़े हुए हैं ऐसा सिस्टम बना कर हम अच्छा कमा सकते हैं, यह जमीन लीज पर है हम खेती के साथ मुर्गी बत्तख और बकरी पालन करेंगे साथ ही साथ डेयरी भी करेंगे सभी सिस्टम के इंटीग्रेटेड होने पर मार्केट पर निर्भरता कम होगी अभी हमारे पास तीन परमानेंट और 10 टेंपरेरी स्टाफ हैं, यह सभी लॉकडाउन के समय से ही अच्छा काम कर रहे हैं हमने उनको सोशल डिस्टेंसिंग भी सिखाया है ।
जैविक कृषक राजीव रंजन पोद्दार ने अंत में यह बताया कि दुनिया में कोई ऐसा काम नहीं है जो इंसान नहीं कर सकता है और कोई ऐसा काम नहीं है जिसमे चैलेंज नहीं है हर फील्ड के अपने चैलेंज होते हैं, नए लोग चैलेंज लेकर कंफर्ट जोन से बाहर निकले और डर के आगे जीत होती है, लोकल टू भोकल बहुत जरूरी है, यूएस में लोग रेस्टोरेंट में लोकल पानी मांगते हैं लेकिन इंडिया में लोग ब्रांडेड मांगते हैं, प्रधानमंत्री का यह एक बहुत बड़ा संदेश है कि आप अपने लोकल चीजों का इस्तेमाल शुरु करो और क्वालिटी का ध्यान रखें ताकि देेश का पैसा देश में ही रहे ।

अमेरिका से लौटकर लॉकडाउन के दौरान जैविक खेती में चमत्कार कर राजीव रंजन ने रामगढ़ की धरती पर प्रधानमंत्री जी के लोकल टू भोकल को उतारा है, कंप्यूटर पर दौड़ने वाली उंगलियां अब खेतों में दौड़ रही हैं जिससे जहां चाह वहां राह वाली यह कहावत चरितार्थ हुआ है। इनके इस प्रयास से एक तरफ इनकी उगाई सब्जियां खाकर लोग अपने शरीर की प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाएंगे तो दूसरी तरफ रोजगार के नए रास्ते का भी सृजन होगा।

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