Logo
ब्रेकिंग
बीएफसीएल द्वारा महेश्वर धाम में दो दिवसीय निःशुल्क नेत्र जांच शिविर का आयोजन, 163 लाभार्थियों की हुई... झारखंड को मिली बड़ी सौगात,17 जनवरी को खुलेगा सब-डीओ कार्यालय, आर्मी लैंड केस अब लोकल लेवल पर! गुरुजी के घर पहुंचे अखिलेश यादव, भावुक होकर कहा – आदिवासियों की आवाज़ हमेशा गूंजेगी मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन राजनीति की चकाचौंध से दूर पैतृक गांव नेमरा की मिट्टी में रचे-बसे नज़र आ रहे ... रामगढ़ की बेटी चंद्र ज्योति उपाध्याय ने रचा इतिहास, JPSC में पाई 70वीं रैंक, बनीं डिप्टी कलेक्टर युवा आजसू का संकल्प – हर गांव, हर विद्यालय में हरा अभियान! आफ़ताब अंसारी के मामले कि जांच और परिजनों को मिले मुआवजा : जोया प्रवीण रामगढ़ थाना से फरार आफताब कि मौ*त, जमकर बवाल, इंस्पेक्टर प्रमोद सिंह और कई पुलिसकर्मी निलंबित रामगढ़ डीसी बने फरिश्ता, बेहोश स्कूली बच्चे को अपनी गाड़ी से पहुंचाया अस्पताल, बचाई जान प्रधान सचिव पेयजल एवं स्वच्छता विभाग झारखंड सरकार श्री मस्त राम मीणा ने किया रामगढ़ जिले का दौरा।

राजस्थान में मासूम से हैवानियत मामले में देरी से मामला दर्ज करने पर मानवाधिकार आयोग ने डीजीपी,आईजी और एसपी को जारी किया नोटिस

उदयपुर। राजसमंद में सात साल की मासूम से बेरहमी के मामले में देरी से मामला दर्ज किए जाने पर राजस्थान मानवाधिकार आयोग ने प्रदेश के पुलिस मुखिया डीजीपी, उदयपुर आईजी तथा राजसमंद जिला पुलिस अधीक्षक को नोटिस जारी किया है। जिसमें उनसे पूछा गया है कि थाने में पीड़िता के लाए जाने के बाद भी एफआईआर दर्ज करने में देरी किस लिए की गई। जबाव के लिए उन्हें पंद्रह दिन का वक्त दिया गया है।

राज्य मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष जस्टिस महेश चंद्र शर्मा की ओर से जारी नोटिस में लिखा गया है कि सात साल की बालिका से हैवानियत की गई। पुलिस ने ना केवल आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज करने में देरी की, बल्कि उसे थाने से भगाने की भी जानकारी मिली है।

जस्टिस महेश चंद्र शर्मा ने टिप्पणी करते हुए कहा कि यह बहुत ही जघन्य एवं घृणित घटना है, इससे मानवता शर्मसार हुई है। सात साल की एक बालिका पर किया गया अत्याचार एवं कुंठापूर्ण व्यवहार सभ्य समाज पर एक दाग है। इस प्रकार की घटना समाज में फैल रही विकृति को दर्शाती है एवं घटते सामाजिक मूल्यों का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि राजसमंद के अतिरिक्त जिला एवं सेशन न्यायाधीश नरेंद्र कुमार द्वारा हस्तक्षेप करने के बाद ही पुलिस ने एफआईआर दर्ज की। ऐसे संवेदनशील मामले में पुलिस द्वारा की गई लापरवाही एवं असंवेदनशीलता राज्य की पुलिस की कार्यशैली पर भी प्रश्न चिन्ह लगाता है।

यह था मामला

उल्लेखनीय है कि राजसमंद जिले के भीम थाना क्षेत्र के थानेट गांव में सात साल की एक मासूस के साथ अपने ही हैवानियत कर रहे थे। बिना मां की इस बालिका को पिछले कई महीने से उसके रिश्तेदार जो रिश्ते में भाई-भाभी लगते थे, वे उसके शारीरिक और यौन उत्पीडन कर रहे थे। आरोपी ना केवल उसको निर्वस्त कर मारपीट करते, बल्कि लोहे के गर्म सरिए और जलती सिगरेट से दागते थे।

यहां तक उन्होंने मासूम के हाथ-पैर के नाखून तक निकाल लिए। पिछले दिनों उसके साथ हुए अत्याचार का वीडियो वायरल होने पर इसका पता चला और चाइल्ड लाइन संस्था के सदस्य उसके पास पहुंचे तथा ग्रामीणों को साथ लेकर भीम थाने पहुंचे। जहां आठ घंटे तक पीड़ित बालिका को बिठाए रखा लेकिन पुलिस ने मामला दर्ज नहीं किया। बाद में विधिक सेवा प्राधिकरण राजसमंद और अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश नरेंद्र कुमार गहलोत की दखल के बाद पुलिस ने मामला दर्ज किया और आरोपी दंपती किशन सिंह और उनकी पत्नी रेखा को गिरफ्तार कर लिया।