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Supreme court का आदेश बेसमेंट (basement) में सिर्फ हो पार्किंग l क्या होता है इसका पालन?

सुप्रीम कोर्ट, देश का सर्वोच्च न्यायालय जिनके आदेश का पालन करना हम सभी का कर्तव्य है वही उसे इंप्लीमेंट करवाना कार्यपालिका का काम है l

लेकिन क्या ऐसा सत प्रतिशत हो पाता है?

इसका जवाब आप खुद इस खबर को वीडियो को देखने के बाद बता सकते हैं l

हम बात कर रहे हैं बेसमेंट की जी हां बेसमेंट जिसे हम तहखाना भी कहते हैं l जिसका हमेशा विवादों से नाता रहता है और हो भी क्यों ना ज़ब सर्वोच्च न्यायालय और उच्च न्यायालय का सख्त आदेश जिसमें बेसमेंट में सिर्फ पार्किंग होना हैं उसके सिवाय कुछ नहीं करना हैं फिर भी बेसमेंट की हाल, सुप्रीम कोर्ट के आदेश के विपरीत्ति संचालित होती नजर आती l
चाहे आप राजधानी दिल्ली की बात करें या फिर झारखंड के रांची जमशेदपुर या फिर रामगढ़ जिले की जहाँ हमेशा बेसमेंट को लेकर विवादों का सिलसिला जारी रहता है l
आपको बता दें कि महज कुछ माह पूर्व दिल्ली में बेसमेंट का उपयोग आप किन कामों के लिए नहीं कर सकते हैं इसको लेकर HC ने अहम फैसला सुनाया था l

दिल्ली में पिछले माह से बेसमेंनट उपयोग करने को लेकर मालिकों को लगातार नोटिसें मिल रही हैं. हालांकि, बेसमेंट मालिकों का मानना है कि इसका उपयोग वह सालों से कई तरह के कामों के लिए करते आ रहे हैं. लेकिन, अब (MCD and NDMC) के द्वारा कानूनी कार्रवाई की लगातार धमकियां मिल रही हैं. ऐसे में पिछले दिनों ही दिल्ली हाई कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि बेसमेंट का उपयोग सिर्फ पार्किंग के लिए ही किया जा सकता है l
19 सितंबर 2022 को न्यूज़ 18 में छपी खबर के अनुसार
दिल्ली हाई कोर्ट ने एक निजी संस्थान के याचिका पर फैसला सुनाया है. इस फैसले के बाद अब दिल्ली के कई पॉश इलाकों खासकर एनडीएमसी क्षेत्र में आने वाले इलाकों के मकान मालिकों में दहशत है.आपको बता दें कि दिल्ली हाई कोर्ट ने बीते दिनों कहा था कि बेसमेंट में कोचिंग संस्थान या कंपनियों के दफ्तर नहीं चल सकते हैं. कार पार्किंग के लिए इस्तेमाल हो रहा बेसमेंट में गैराज नहीं चल सकता है और न ही कोई अन्य व्यावसायिक गतिविधियां नहीं चल सकती हैं मतलब साफ है कि बेसमेंट में पार्किंग के सिवाय कुछ भी नहीं किया जा सकता l
यह हैं बेसमेंट को लेकर सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के आदेश l
इधर 27 अप्रैल 2023 को प्रभात खबर में छपी खबर के अनुसार
झारखंड हाई कोर्ट ने भी रांची के विभिन्न बेसमेंटों में हो रही व्यावसायिक गतिविधियों के विरुद्ध कार्रवाई करने का प्रशासन को आदेश दिया हैं l अदालत में मौखिक रूप से कहा की पार्किंग स्थल का कमर्शियल रूप में प्रयोग करना बिल्कुल गलत है और ऐसे बेसमेंट के ओनर के विरुद्ध जुर्माना लगाते हुए कार्रवाई कि जाए l
अब आते हैं झारखंड के रामगढ़ छावनी परिषद क्षेत्र में जहां का अपना खुद का ही बिल्डिंग बायोलॉज है यहां पर भी बेसमेंट का मुद्दा वर्षों से गंभीर चर्चा का विषय रहा हैl बीते कुछ माह पहले रामगढ़ विधानसभा के पूर्व विधायक शंकर चौधरी द्वारा सुप्रीम कोर्ट के आदेश का हवाला देते हुए और लगातार शहर में लग रही जाम से लोगों को हो रही परेशानियों के मद्देनजर लगातार आंदोलन चलाए जाने के बाद शहर में अवैध तरीके से बने बेसमेंट को ले छावनी परिषद द्वारा कार्रवाई शुरू हुई थी l जिससे शहर में हड़कंप मच गया है। सीईओ के इस कार्रवाई के पक्ष-विपक्ष में कई राजनीतिक दल के नेता भी सामने आ गए है। सीईओ ने अवैध निर्माण व बेसमेंट बनाने वाले सैकड़ो लोगों के विरुद्ध नोटिस जारी किया था ।
इतना ही नहीं प्रेस कॉन्फ्रेंस कर पूर्व विधायक शंकर चौधरी ने छावनी परिषद के ऊपर उगाही करने मतलब लाखों रुपए घूसखोरी का आरोप लगा कोर्ट के आदेश का पालन नहीं करने की बात कही थी. जिस पर गलत बयानबाजी व आरोप लगाने को लेकर उसे वक्त पदस्थापित सीईओ ने पूर्व विधायक शंकर चौधरी के विरुद्ध मानहानी का मुकदमा दायर करने की बात कही है।
मतलब साफ है कि पूरे देश चाहे हमारा रामगढ़ हो रांची या फिर देश की राजधानी दिल्ली देश के सर्वोच्च न्यायालय का बेसमेंट को लेकर आदेश और हमारे एग्जीक्यूटिव बॉडी मतलब जिला प्रशासन महोदय की उनका पालन करवाते हुए कार्रवाई वाली तस्वीर को आप खुद देख कर बयान कर सकते हैं l आम और खास कुछ सुविधा प्रदान करने और जाम की स्थिति से निपटने, सहित सुरक्षा के कई मानकों के आधार पर सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश की तस्वीर क्या है आप खुद देख सकते हैं l
हम अगले अंक में आपको बताएंगे कि बेसमेंट को क्यों किसी भी प्रकार की व्यावसायिक गतिविधि के लिए संचालित करने पर पूर्णता रोक है और क्यूँ बेसमेंट में सिर्फ और सिर्फ पार्किंग की अनुमति दी जाती है l तब तक के लिए हम आपसे विदा लेते हैं फिर मिलते हैं अगले एपिसोड में…
जय हिंद, जय भारत l