मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन राजनीति की चकाचौंध से दूर पैतृक गांव नेमरा की मिट्टी में रचे-बसे नज़र आ रहे हैं।
नेमरा की पगडंडियों पर लौटे हेमंत, किसानों के संग बचपन की यादें ताज़ा
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन इन दिनों राजनीति की चकाचौंध से दूर, अपने पैतृक गांव नेमरा की मिट्टी में रचे-बसे नज़र आ रहे हैं। 16 अगस्त को पिता शिबू सोरेन के दसकर्म के धार्मिक आयोजन के लिए गांव में डेरा जमाए हेमंत, यहां सिर्फ बेटे की भूमिका नहीं निभा रहे—बल्कि उस गांव के हेमंत बन गए हैं, जिसे लोग बचपन से जानते हैं।
सुबह की हल्की धूप में, बिना तामझाम और प्रोटोकॉल के, वे पगडंडियों पर पैदल चलते हुए खेत-खलिहान तक पहुंच जाते हैं। रास्ते में मिट्टी की सोंधी खुशबू और किसानों की मुस्कान उनका स्वागत करती है। खेत में काम करती महिलाएं, बीज छांटते बुजुर्ग, और फसल की चिंता में डूबे नौजवान—सभी से वे उतनी ही आत्मीयता से बात करते हैं, जैसे बरसों पुराने साथी हों।
गांव के लोग कहते हैं, “ये वही हेमंत हैं, जो बचपन में यहां नंगे पांव खेतों में दौड़ते थे।”
इसी बीच, नेमरा गांव में 16 अगस्त के कार्यक्रम की तैयारियां जोरों पर हैं। बरसी के मौके पर हजारों लोग जुटेंगे, लेकिन फिलहाल, मुख्यमंत्री के लिए यह समय है—मिट्टी और अपने लोगों और यादों से जुड़ने का।
नेमरा की पगडंडियों पर चलता ये सफर… सिर्फ एक बेटा और उसके गांव के बीच का रिश्ता नहीं, बल्कि सत्ता के गलियारों से दूर सादगी और अपनापन की मिसाल भी है।”
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